राम मंदिर चंदा विवाद

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चंदे और जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और संबंधित संगठनों पर सवाल उठाते हुए मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि जमीन के एक सौदे में बेहद कम समय के भीतर कीमत में बड़ा अंतर आया, जबकि मामले की जांच से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है।

पार्टी ने मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावे का पूरा विवरण सामने लाने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।

जमीन के सौदे में पांच मिनट के अंतर पर सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े जमीन के एक सौदे का जिक्र करते हुए कीमतों में अंतर पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, शाम 7:10 बजे कुसुम पाठक से संबंधित जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। इसके लगभग पांच मिनट बाद, शाम 7:15 बजे, उसी जमीन को ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

रमेश ने पूछा कि महज पांच मिनट के भीतर जमीन की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई। उन्होंने इस लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और सौदे की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की।

कांग्रेस ने इस मामले को वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। वहीं, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच के आधिकारिक परिणाम सामने आना आवश्यक है।

जमीन की रजिस्ट्री और जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल

जयराम रमेश ने जमीन की रजिस्ट्री में दर्ज गवाहों को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित दस्तावेजों में तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के नाम गवाह के रूप में शामिल थे।

कांग्रेस नेता ने वर्ष 2021 में हुई जांच का हवाला देते हुए पूछा कि इसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने जमीन के सौदों की जांच कर रही विशेष जांच टीम के निष्कर्षों को सामने लाने की मांग भी की।

पार्टी का कहना है कि मामले से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है। जांच रिपोर्ट की उपलब्धता और उसकी मौजूदा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि इस विवाद के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ से कांग्रेस ने मांगा जवाब

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से एकत्र किए गए धन के उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।

जयराम रमेश ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए चंदे के इस्तेमाल में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को धन के उपयोग की जानकारी मिल सके।

प्राथमिकी दर्ज करने में देरी का मुद्दा भी उठा

कांग्रेस ने कथित चोरी से जुड़े एक वीडियो और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। पार्टी के मुताबिक, चार जून को संबंधित वीडियो सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में 21 दिन की देरी हुई थी।

कांग्रेस ने इस देरी के कारणों को स्पष्ट करने और पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी सामने आती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

राम मंदिर चंदा विवाद के बीच कांग्रेस ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है। पार्टी चाहती है कि जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज, जांच की स्थिति और चढ़ावे के उपयोग का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

इस विवाद में एक ओर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवाल हैं, तो दूसरी ओर आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और दस्तावेजों की आवश्यकता है। संबंधित पक्षों के जवाब तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्ट स्थिति बन सकेगी।

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