भारत में अवैध प्रवास और शरणार्थी संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अदालत ने रोहिंग्याओं की कानूनी स्थिति को लेकर सरकार से चार अहम सवाल पूछे हैं।

इन सवालों में शरणार्थी दर्जे का हक, हिरासत की अवधि, शिविरों में मौलिक सुविधाएं, और सरकार का कानूनी दायित्व शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि कोर्ट इन मुद्दों को केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देख रहा है।

अदालत की यह सक्रियता ‘ऑपरेशन पुशबैक’ जैसे अभियानों पर भी सवाल खड़े करती है, जहां अवैध रूप से रह रहे लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के वापस भेजा जा रहा है।

सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई देश की शरणार्थी नीति के भविष्य को तय कर सकती है।