अभिनेता संजय मिश्रा अब अपनी जिंदगी को किताब के जरिए सामने लाएंगे। उनकी पहली आत्मकथा का नाम ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ है। इसमें करियर और निजी जीवन से जुड़े अनुभव शामिल होंगे। किताब में संघर्ष और सीख से जुड़े कई किस्से भी होंगे।
किताब में सिनेमा से जुड़े अनुभव होंगे
आत्मकथा में अभिनेता अपने लंबे फिल्मी सफर को साझा करेंगे। इसमें पर्दे के पीछे की अनकही घटनाएं भी शामिल होंगी। इसके अलावा संघर्ष के दौर और उनसे मिली सीख भी लिखी गई है।
अभिनेता ने अपनी लेखन यात्रा को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह लिखेंगे और पाठक उसे पढ़ेंगे। उनकी किताब का अंदाज उनके सहज व्यक्तित्व से जुड़ा रहेगा।
जनवरी 2027 में होगी किताब की लॉन्चिंग
यह किताब जनवरी 2027 में विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च होगी। इसका प्रकाशन पेंगुइन स्वदेश की ओर से किया जाएगा। प्रकाशक ने भी इस किताब को लेकर जानकारी साझा की है।
किताब को लेकर पाठकों में अभी से उत्सुकता है। इसकी वजह अभिनेता का लंबा और विविधतापूर्ण फिल्मी सफर है। उन्होंने कॉमेडी से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक काम किया है।
पिता को समर्पित है किताब
संजय मिश्रा ने अपनी पहली किताब दिवंगत पिता शंभू नाथ मिश्रा को समर्पित की है। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने का प्रसंग भी याद किया। इसी दौरान उन्हें अपने पिता की याद आई थी।
अभिनेता ने पुरस्कार मंच से जुड़े भावुक अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने पिता को अपने जीवन की यात्रा का अहम हिस्सा बताया। किताब में इन भावनात्मक यादों की झलक भी मिलेगी।
‘भक्षक’ के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
फिल्म ‘भक्षक’ में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता चुना गया। उन्हें यह सम्मान फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए मिला।
यह सम्मान उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इसके बाद उनकी आत्मकथा की घोषणा भी चर्चा में आई। किताब उनके अभिनय सफर का एक नया पहलू दिखाएगी।
थिएटर से फिल्मों तक पहुंचा सफर
अभिनेता ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने 1995 में ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया’ से फिल्मी शुरुआत की। इसके बाद कई चर्चित फिल्मों में नजर आए।
उनकी फिल्मों में ‘आंखों देखी’ और ‘मसान’ शामिल हैं। ‘वध’ में भी उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। वहीं ‘गोलमाल’ और ‘धमाल’ में उन्होंने अलग अंदाज दिखाया।
अलग-अलग किरदारों से बनाई पहचान
उनके करियर में गंभीर और हास्य भूमिकाओं का संतुलन रहा है। उन्होंने छोटे किरदारों में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। यही विविधता उनकी आत्मकथा को खास बनाती है।
किताब में उनके अभिनय सफर के कई पड़ाव सामने आएंगे। पाठकों को संघर्ष और सफलता दोनों की कहानी मिलेगी। साथ ही सिनेमा के पीछे की दुनिया भी समझने को मिलेगी।
किताब से जुड़ी अहम जानकारी
- किताब का नाम ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ है।
- इसका प्रकाशन पेंगुइन स्वदेश से होगा।
- जनवरी 2027 में विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च होगी।
- किताब दिवंगत पिता शंभू नाथ मिश्रा को समर्पित है।
फिल्मी करियर की प्रमुख उपलब्धियां
- ‘भक्षक’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
- ‘मसान’ और ‘आंखों देखी’ में अहम भूमिकाएं कीं।
- ‘गोलमाल’ और ‘धमाल’ में कॉमेडी किरदार निभाए।
- नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय प्रशिक्षण लिया।
संजय मिश्रा की आत्मकथा अब उनके अभिनय सफर से आगे बढ़ेगी। ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ में जीवन के कई अनुभव होंगे। किताब में संघर्ष, सफलता और सीख के पहलू सामने आएंगे। जनवरी 2027 में इसके लॉन्च का इंतजार रहेगा।
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