आश्विन मास की अमावस्या इस बार शनिवार को पड़ रही है। 10 अक्टूबर को पड़ने वाली यह तिथि पितृ पक्ष का समापन करेगी। शनिवार के संयोग के कारण इसे सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के साथ शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ज्ञात और अज्ञात पितरों का स्मरण किया जाता है। श्राद्ध, तर्पण, धूप-ध्यान और दान जैसे कर्म करने की परंपरा है। साथ ही शनिवार होने के कारण शनि देव की पूजा भी की जा सकती है।
पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण का महत्व
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम तिथि मानी जाती है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जा सकता है, जिनका तर्पण किसी कारण से नहीं हो पाया।
दोपहर के समय पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। परिवार अपनी मान्यताओं और परंपरा के अनुसार पूजा विधि अपना सकते हैं। पितरों का स्मरण श्रद्धा और शांत मन से करने पर विशेष जोर दिया जाता है।
धूप-ध्यान के लिए ये सामग्री रखें
पितरों के लिए धूप-ध्यान करते समय कुछ सामान्य सामग्री रखी जा सकती है। इसमें कंडे, घी, काले तिल, चावल और गुड़ शामिल हैं। कपूर, फूल और जल से भरा तांबे का लोटा भी रखा जा सकता है।
धूप देने के लिए हवन कुंड या उपयुक्त बर्तन का इस्तेमाल किया जा सकता है। सभी सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर भी उपलब्ध वस्तुओं से श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण किया जा सकता है।
शनिवार होने से शनि पूजा का भी संयोग
इस बार सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या शनिवार के दिन है। इसलिए शनि देव से जुड़े धार्मिक उपाय भी किए जा सकते हैं। सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है।
काले तिल, जौ, कच्चे दूध और जल से पूजा संबंधी कर्म किए जा सकते हैं। शनि मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करने की भी मान्यता है। इसके बाद जल पीपल के पेड़ में अर्पित किया जा सकता है।
पीपल के पास दीपक जलाने की परंपरा
शनिवार को पीपल पूजन का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। शाम के समय पीपल के पास घी का दीपक जलाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पीपल का पूजन भी कर सकते हैं।
शनि मंदिर में सरसों के तेल से अभिषेक करने की भी परंपरा है। इसके अलावा काले तिल, काली उड़द और काला वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं।
हनुमान जी की पूजा भी कर सकते हैं
शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने की भी धार्मिक मान्यता है। इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाया जा सकता है। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे शनि से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, ऐसे उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए।
दान और सेवा से जुड़े शुभ कार्य
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर दान और सेवा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जा सकता है। बच्चों को खाना खिलाने और रोगियों की दवा में सहायता करने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
इसके अलावा गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं में कौए को पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन कौए को भोजन कराने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।
श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। क्रोध से बचना और घर में शांत वातावरण रखना भी जरूरी माना गया है।
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