शबाना आजमी

फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने फिल्म के प्रदर्शन पर अपनी निराशा जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि दर्शक सनी देओल को मुस्लिम किरदार में स्वीकार क्यों नहीं कर पाए।

राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी। कहानी 1947 के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी और करण देओल अहम भूमिकाओं में हैं।

‘बंटवारा 1947’ पर क्या बोलीं शबाना?

शबाना आजमी ने जूम के साथ बातचीत में फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उनसे फिल्म की तारीफ की। दर्शकों ने फिल्म के संदेश को भी महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, यह प्रतिक्रिया सिनेमाघरों की संख्या में नजर नहीं आई।

अभिनेत्री के मुताबिक, फिल्म देखने वाले कुछ दर्शकों की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही। इसलिए उन्होंने फिल्म की कहानी और उसके संदेश की स्वीकार्यता को लेकर सवाल उठाया।

सनी देओल के मुस्लिम किरदार पर सवाल

अभिनेत्री ने बातचीत के दौरान पूछा कि सनी देओल को मुस्लिम किरदार में स्वीकार करने में परेशानी क्यों हुई। उन्होंने इसके लिए अमिताभ बच्चन के पुराने किरदारों का उदाहरण दिया।

उनका कहना था कि अमिताभ बच्चन ने ‘कुली’ सहित कई फिल्मों में मुस्लिम किरदार निभाए थे। इसके अलावा उन्होंने ‘दीवार’ में 786 के इस्तेमाल का भी संदर्भ दिया। उनके मुताबिक, उस दौर में ऐसे किरदारों को दर्शकों ने सहजता से स्वीकार किया था।

अमिताभ बच्चन का उदाहरण क्यों दिया?

शबाना आजमी का तर्क केवल सनी देओल की फिल्म तक सीमित नहीं है। उन्होंने अभिनेता की लोकप्रिय स्क्रीन इमेज और उसके नए किरदार के बीच अंतर को रेखांकित किया।

सनी देओल लंबे समय से एक्शन और देशभक्ति से जुड़े किरदारों के लिए पहचाने जाते हैं। इसके विपरीत, ‘बंटवारा 1947’ में उन्होंने सिकंदर मिर्जा नाम के भारतीय मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभाई है। फिल्म में उनका परिवार विभाजन के दौरान पाकिस्तान जाने को मजबूर होता है।

राजकुमार संतोषी भी बता चुके हैं वजह

फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी पहले ही सनी देओल की कास्टिंग को लेकर चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने बताया था कि निवेशकों और वितरकों के बीच इस किरदार को लेकर हिचकिचाहट थी।

संतोषी के मुताबिक, सनी को मुस्लिम किरदार में देखना उनके पुराने एक्शन स्टार इमेज से बिल्कुल अलग था। उन्होंने इसे एक जोखिम माना, लेकिन इसी वजह से वह इस भूमिका के लिए सनी देओल को चुनना चाहते थे।

फिल्म में शबाना आजमी का किरदार

फिल्म में अभिनेत्री ने एक बुजुर्ग हिंदू महिला का किरदार निभाया है। कहानी में उनका चरित्र विभाजन के दौरान लाहौर स्थित अपने घर को छोड़ने से इनकार करता है।

दूसरी ओर, सनी देओल और प्रीति जिंटा मुस्लिम दंपती की भूमिका में नजर आते हैं। परिवार को विभाजन की परिस्थितियों के कारण लाहौर जाना पड़ता है। यही परिस्थितियां दोनों परिवारों के बीच भावनात्मक टकराव की वजह बनती हैं।

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन

‘बंटवारा 1947’ का प्रदर्शन रिलीज के बाद उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहा। फिल्म की रिलीज उसी दिन हुई थी, जिस दिन इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ सिनेमाघरों में आई।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, ‘बंटवारा 1947’ का थिएट्रिकल रन करीब 37 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ खत्म हुआ। वहीं ‘आवारापन 2’ ने इससे काफी बेहतर प्रदर्शन किया।

क्या दर्शकों की पसंद बदली है?

फिल्म के प्रदर्शन के बाद अब चर्चा केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है। सनी देओल का मुस्लिम किरदार और उनकी स्थापित छवि लगातार चर्चा में है।

शबाना आजमी ने इसी अंतर को अपने सवाल का आधार बनाया है। वहीं निर्देशक राजकुमार संतोषी का कहना है कि किरदार को जानबूझकर सनी की सामान्य छवि से अलग रखा गया था।

विभाजन की कहानी और फिल्म का संदेश

‘बंटवारा 1947’ का आधार असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या ओ जम्याई नई’ से जुड़ा है। फिल्म का केंद्र विभाजन के दौरान इंसानियत, विस्थापन और रिश्तों की कहानी है।

ऐसे में फिल्म ने एक अभिनेता को उसकी स्थापित छवि से अलग भूमिका में पेश किया। इसी वजह से सनी देओल की कास्टिंग फिल्म के सबसे चर्चित पहलुओं में शामिल रही।

बॉलीवुड में आगे बढ़ सकती है बहस

इस विवाद ने हिंदी सिनेमा में कलाकारों की स्क्रीन इमेज और किरदारों की स्वीकार्यता को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। एक तरफ निर्देशक ने जोखिम लेकर सनी देओल को अलग भूमिका दी। दूसरी ओर, शबाना आजमी ने दर्शकों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया।

कुल मिलाकर, ‘बंटवारा 1947’ का प्रदर्शन भले ही उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा हो। लेकिन सनी देओल के किरदार को लेकर उठी बहस आने वाले समय में हिंदी फिल्मों में ऐसी कास्टिंग पर चर्चा को प्रभावित कर सकती है।


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