अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाले पैरा-आर्मरेसलर श्रीमंत झा ने राज्य सरकार के समक्ष न्याय की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि वह हर वर्ष खेल पुरस्कार के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है।

हाल ही में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप 2025 में कांस्य पदक जीता है, लेकिन फिर भी उन्हें राज्य स्तर पर कोई मान्यता नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि “हमें सिर्फ मेडल नहीं चाहिए, हमें पहचान चाहिए, ताकि भविष्य के खिलाड़ी प्रेरणा लें।”

श्री झा का कहना है कि जब मध्यप्रदेश, कर्नाटक, केरल और मेघालय जैसे राज्य अपने दिव्यांग खिलाड़ियों को पुरस्कार दे सकते हैं, तो छत्तीसगढ़ में ऐसी नीति क्यों नहीं बन सकती?

वे बताते हैं कि दिव्यांगता के बावजूद वे एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं और पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। उनका संघर्ष हर युवा को प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री और खेल मंत्री से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि “दिव्यांग खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे वर्ग की उपेक्षा है।” उन्हें सम्मान देना, पूरे समाज को प्रोत्साहन देना होगा।