उत्तर प्रदेश में कथित अवैध निर्माणों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा निर्देश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आगामी सात दिनों तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी, और इस दौरान दोनों पक्ष स्टेटस को बनाए रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए जाने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए, जबकि पहले उन्हें हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी चाहिए थी। वकीलों ने दलील दी कि ‘बुलडोजर न्याय’ पर सुप्रीम कोर्ट का पिछला फैसला लागू होता है इसलिए वे सीधे सर्वोच्च अदालत पहुँचे। इस पर बेंच ने कहा कि यदि सभी मामले सीधे सुप्रीम कोर्ट में पहुँचेंगे तो अनुच्छेद 226 यानी हाईकोर्ट की शक्तियों का क्या महत्व रह जाएगा

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि बिना किसी नोटिस के ढांचे का आंशिक ध्वस्तीकरण किया गया, जबकि प्रशासन से सुनवाई की मांग की गई थी। वकील ने यह भी बताया कि बुलडोजर अभी भी मौके पर मौजूद हैं और कभी भी पूरा निर्माण गिराया जा सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि वे सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन यह सिर्फ सात दिन के लिए होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा, और हाईकोर्ट अपने नियमों के अनुरूप मामले की सुनवाई करेगा।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 के एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी संपत्ति को ध्वस्त करने से पहले नोटिस देना और जवाब के लिए 15 दिन का समय देना अनिवार्य है, अन्यथा यह कार्रवाई मनमानी मानी जाएगी। हालांकि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे या पहले से कोर्ट के आदेश वाले मामलों पर यह सुरक्षा लागू नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है, और अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की होने वाली सुनवाई पर हैं।