रायपुर। दुर्ग जिले के अहिवारा में बुधबार को राज्यपाल अनुसुईया उइके मुमुक्षु रोशनी बाफना और पलक डांगी के दीक्षा संस्कार के पूर्व आयोजित वरघोड़ा शोभायात्रा एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महावीर स्वामी इस धरा पर ऐसे महापुरूष थे, जो स्वयं राज-परिवार में पैदा हुए, लेकिन उन्होंने सांसारिक मोहमाया त्याग कर सत्य, अहिंसा का मार्ग अपनाया।

उनके दिए गए उपदेश पूरे समाज को मानवता का संदेश देते हैं। जीवन के जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त हो जाना ही मोक्ष है। जैन धर्म के अनुसार सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र से प्राप्त किया जा सकता है। दीक्षा प्राप्त करना इस मोक्ष प्राप्ति की राह में अग्रसर होना है। राज्यपाल ने मुमुक्षु रोशनी बाफना एवं पलक डांगी को शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया।

राज्यपाल उइके ने कहा कि जैन भिक्षुक का जीवन आमजनों के लिए प्रेरणादायी होता है। वे केवल अपने समाज को ही राह नहीं दिखा रहे, उनके सद्गुणों और प्रवचनों से पूरे समाज को नई दिशा मिल रही है। जैन संत अपने वचनों से समाज को सन्मार्ग में चलने का रास्ता दिखाते हैं। आज जब पूरा विश्व कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में जैन संतों का जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

राज्यपाल ने कहा कि मनुष्य कई योनियों में जन्म लेता है, जिसमें से एक योनी मानव योनी होती है। इस योनी में मोक्ष को प्राप्त करना एक परम कल्याण का अवसर है। आज एक तरफ पूरी दुनिया भौतिक चीजों के पीछे भाग रही है, सांसारिक सुख-सुविधाओं के प्रति गहरी आसक्ति है। ऐसे समय में इन तमाम सांसारिक चीजों को समर्पण के साथ त्याग करना अपने आप में बेहद बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि दीक्षित व्यक्ति ही महावीर स्वामी जी के बताए मार्ग पर चलने में समर्थ होता है। श्री गुरुदेव की कृपा और शिष्य की श्रद्धा, इन दो पवित्र धाराओं का संगम ही दीक्षा है।