पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से विभाग या मंत्रालय बने
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थानेश्वर साहू ने किया पदभार ग्रहण
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त थानेश्वर साहू ने गुरूवार को न्यू सर्किट हाउस के सभाकक्ष में आयोजित समारोह में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ा वर्ग की जनगणना होनी चाहिए, क्योंकि सरकार के पास पिछड़ा वर्ग के लिए लोगों के लिए योजनाएं तो है, पर जनगणना के अभाव में जनसंख्या की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से विभाग या मंत्रालय भी बनाया जाना चाहिए।
गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू समारोह में विशेष रूप से उपस्थित थे। गृह मंत्री ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का पदभार ग्रहण करने पर थानेश्वर साहू को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पदभार ग्रहण करने के साथ ही आयोग के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को अपने कार्य को व्यापक और विस्तारित करने की जरूरत है।
आयोग के अध्यक्ष ने जताया आभार
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थानेश्वर साहू ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन ने जो जवाबदारी मुझे सौंपी है उसका निर्वहन समाज के हित में करूंगा। कार्यक्रम को अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैैजनाथ चंद्राकर, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग महेन्द्र छाबड़ा, अध्यक्ष प्रदेश दुग्ध महासंघ विपिन साहू, उपाध्यक्ष कृषक कल्याण बोर्ड महेन्द्र चंद्राकर ने भी सम्बोधित किया।
कार्ययोजना तैयार करें
पिछड़ा वर्ग में शामिल जातियों के हितों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। मंत्री श्री साहू ने कहा कि देश के अलग-अलग प्रदेशों में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राज्य का पिछड़ा वर्ग आयोग देश में पिछड़ा वर्ग के लिए अच्छा कार्य करने वाले चार-पांच राज्यों का चयन कर वहां का अध्ययन भ्रमण करें। राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग के पदाधिकारियों को जिले के अलावा विकासखण्ड में जाकर भी दौरा कर वहां लोगों से शिक्षा, व्यवसाय, खेती-किसानी आदि के संबंध में चर्चा करें कि वे क्या करना चाहते हैं।
दे सकते हैं सुझाव
अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग भी प्रदेश में अच्छे कार्यों के लिए छोटे से छोटे सुझाव आयोग को दे सकते हैं। उसकी एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछड़ा वर्ग आयोग की सूची है। इस सूची के आधार पर यह भी आंकलन किया जाए कि अन्य पिछड़ा वर्ग में और कौन सी जाति जुडऩा चाहती है तथा कौन सी छोडऩा चाहती है। आयोग विकासखण्डों में जाकर जाति की सूची को प्रमाणित करवाएं। इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल मरार, पटेल, धोबी एवं कुम्हार जैसी अन्य जातियों की प्रगति पर भी ध्यान दें।
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