भारत में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना तेज़ी से लागू हो रही है, लेकिन कई शहरों में यही पानी लोगों के लिए बीमारी और मौत का कारण बन रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे मामले बताते हैं कि पेयजल की गुणवत्ता अब एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है।

इंदौर: स्वच्छ शहर की छवि पर सवाल

देश के सबसे साफ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई। जांच में सामने आया कि एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। हजारों लोग बीमार हुए और मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकारी रिपोर्टों में भी विरोधाभास देखने को मिला।

उज्जैन: महीनों से गंदा पानी

उज्जैन के जयसिंहपुरा इलाके में रहवासी पिछले दो महीनों से काले और बदबूदार पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं। करीब 265 परिवारों पर स्वास्थ्य संकट मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की सुस्ती चिंता बढ़ा रही है।

भोपाल: ई-कोलाई से बढ़ा खतरा

भोपाल नगर निगम की जांच में कई इलाकों के पानी के सैंपल फेल पाए गए, जिनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में भूजल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सलाह देनी पड़ी।

गांधीनगर: टाइफाइड की मार

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पानी से टाइफाइड के मामलों में तेज़ी से इजाफा हुआ है। सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए और कई सेक्टरों से लिए गए पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए।

नोएडा: उल्टी-दस्त के मामले

ग्रेटर नोएडा के कुछ इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई से लोग बीमार पड़े। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को मौके पर भेजकर इलाज करना पड़ा, जिससे हालात की गंभीरता साफ झलकती है।