हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ‘Dead Economy’ कहकर विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसे अब 7 दिन के लिए टाल दिया गया है। लेकिन यह बयान न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को अपमानित करने वाला था, बल्कि यह ट्रंप की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी नजर आता है।

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप जब खुद अपनी अर्थव्यवस्था के गहरे संकट से जूझ रहे हैं, तो भारत जैसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी पर सवाल उठाना हास्यास्पद लगता है। भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जहां निवेश, व्यापार और उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके विपरीत अमेरिका में आर्थिक संकेतक तेजी से गिर रहे हैं।

अमेरिका में नौकरियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। अप्रैल से अब तक 37,000 से अधिक विनिर्माण नौकरियां समाप्त हो चुकी हैं। जून, मई और जुलाई के महीनों में जो नौकरियां जुड़ी हैं, उनकी संख्या औसत से काफी कम रही है। अमेरिका में बेरोजगारी का स्तर पहले से अधिक हो गया है और मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

ट्रंप ने यह दावा किया था कि उनकी नीतियां अमेरिका को आर्थिक महाशक्ति बनाएंगी, लेकिन 7 महीने बाद यह दावे धराशायी होते नजर आ रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप की नीतियां अब अस्पष्ट और अस्थिर बन चुकी हैं, जिनका असर खुद अमेरिका की जनता भुगत रही है।

ट्रंप की टैरिफ नीतियों और फेडरल रिजर्व पर हमलों ने अमेरिका की वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ दिया है। उन्होंने ब्याज दर घटाने की मांग की, जिससे मुद्रास्फीति और अधिक बढ़ने का खतरा बन गया है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पहले से ही टैरिफ के कारण कीमतें बढ़ चुकी हैं, और अब इस नई नीति से स्थिति और खराब हो सकती है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बिडेन पहले ही ट्रंप की टैरिफ नीति को उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक बता चुके हैं। उन्होंने चेताया था कि इस बोझ को अमेरिका की जनता ही भुगतेगी। आज वही स्थिति बन चुकी है – अमेरिकी उपभोक्ता महंगे उत्पादों और रोजगार संकट की मार झेल रहे हैं।

भारत को ‘Dead Economy’ कहने से पहले ट्रंप को अपनी आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, जबकि अमेरिका में विकास की रफ्तार धीमी हो रही है।

अगर ट्रंप वास्तव में वैश्विक नेता बनना चाहते हैं, तो उन्हें आलोचना से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी अर्थव्यवस्था, तकनीक और स्टार्टअप के जरिए मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा रहा है। और अमेरिका को भारत से प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग की नीति अपनानी चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर ‘डेड इकोनॉमी’ वाली टिप्पणी राजनीति से अधिक कुछ नहीं है। जब अमेरिका में बेरोजगारी की दर बढ़ रही है और नौकरियों में कटौती हो रही है, तब भारत को दोष देना केवल ध्यान भटकाने की रणनीति है।

ट्रंप की टैरिफ नीति से अमेरिका में विनिर्माण सेक्टर को गहरी चोट पहुंची है। रिपोर्ट के अनुसार, 37,000 नौकरियां खत्म हुईं, और ब्याज दर को लेकर ट्रंप फेडरल रिजर्व से भिड़ गए। लेकिन जनता को राहत नहीं मिली।

भारत आज वैश्विक व्यापार और निवेश का केंद्र बन चुका है। 7% की विकास दर और करोड़ों की स्टार्टअप फंडिंग ने भारत को आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।

ट्रंप के समय अमेरिका में महंगाई चरम पर है। खाद्य और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे आम नागरिक परेशान है। इसके बावजूद ट्रंप टैरिफ को ‘जीत’ बताकर असलियत से मुंह मोड़ रहे हैं।

भारत ने हमेशा सहयोग और व्यापार को प्राथमिकता दी है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था अब उनकी नीतियों का परिणाम भुगत रही है।

ट्रंप को खुद की गिरती अर्थव्यवस्था की ज़िम्मेदारी लेनी होगी और भारत पर दोषारोपण बंद करना होगा।