अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद देश के निर्यात उद्योगों में संकट की स्थिति पैदा हो गई है। पहले 7 अगस्त को 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया गया था और 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया गया। इससे सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े उद्योग सभी प्रभावित हो रहे हैं।

उत्तर भारत में पंजाब के रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, पश्चिम में गुजरात के रत्न-आभूषण केंद्र और दक्षिण में तमिलनाडु के कपड़ा एवं मरीन उत्पाद केंद्र सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। पंजाब के उद्योगों में 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर प्रभावित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर और भदोही के चमड़ा और कालीन उद्योगों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।

भारत के टेक्सटाइल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर निर्भर है। अब अमेरिकी बाजार में टेक्सटाइल और कपड़ा महंगा होने से वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया को बढ़त मिल रही है। रत्न-आभूषण उद्योग में गुजरात के सूरत और राजस्थान के जयपुर के निर्यात ऑर्डर प्रभावित हुए हैं। हथकरघा उत्पादों में राजस्थान के जोधपुर, जयपुर और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद तथा सहारनपुर फैक्टरियों में संचालन प्रभावित हो सकता है।

कृषि और मरीन उत्पादों पर भी अमेरिकी टैरिफ का असर देखा जा रहा है। मरीन उत्पाद, मसाले, डेयरी, चावल, आयुष और हर्बल उत्पाद महंगे होने से पाकिस्तान, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिल सकती है।

चमड़ा और फुटवियर उद्योग में उत्तर प्रदेश के कानपुर, आगरा और तमिलनाडु के अंबूर-रानीपेट केंद्र प्रभावित हुए हैं। कालीन उद्योग में भदोही और मिर्जापुर के 17 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर संकट मंडरा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ से उत्पादन में कमी और रोजगार संकट बढ़ सकता है। हालांकि यदि भारत नए निर्यात बाजार विकसित करने में सफल हो जाता है, तो स्थिति को कुछ हद तक सुधारा जा सकता है। फिलहाल, अमेरिकी टैरिफ ने भारत के प्रमुख उद्योगों और निर्यातकों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थिति पैदा कर दी है।