छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सावन सोमवार का तीसरा दिन खेती-किसानी के नाम किया। वे सुबह अपने गृहग्राम बगिया के खेत में पहुंचे। यहां उन्होंने बैलों के साथ हल चलाकर बियासी की।
पानी से भरे खेत में मुख्यमंत्री ने किसान की तरह खेती का काम किया। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन और खेती से जुड़े अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अपनी माटी और खेत से जुड़ाव उन्हें विशेष सुकून देता है।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री ने बगिया के खेत में हल चलाकर बियासी की।
- उन्होंने बैलों के साथ खेती का काम किया।
- मुख्यमंत्री ने खेती को जीवन का संस्कार बताया।
- किसानों के श्रम को प्रदेश की समृद्धि का आधार बताया।
- कृषि परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ाव पर जोर दिया।
विष्णुदेव साय किसान परिवार से आने का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका संबंध किसान परिवार से रहा है। बचपन से उन्होंने खेती-किसानी को करीब से देखा और समझा है। यही वजह है कि खेत और माटी से उनका भावनात्मक जुड़ाव आज भी बना हुआ है।
उन्होंने खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं माना। उनके अनुसार कृषि जीवन के संस्कारों से जुड़ी है। खेतों ने उन्हें मेहनत और श्रम का सम्मान करना सिखाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेतों के बीच समय बिताने से मन को सुकून मिलता है। इससे नई ऊर्जा भी मिलती है।
विष्णुदेव साय किसान के रूप में दिखे सहज
बगिया में खेत पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने बैलों के साथ हल चलाया। उन्होंने पानी से भरे खेत में बियासी का काम किया। इस दौरान उनका सहज ग्रामीण अंदाज देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक जीवन में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है। कृषि परंपराएं समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
छत्तीसगढ़ की पहचान में कृषि की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी माटी और मेहनतकश किसानों से जुड़ी है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है।
पीढ़ियों से किसान अपनी मेहनत से धरती को सींचते आए हैं। उनके परिश्रम ने प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत किया है।
इसके अलावा, ग्रामीण जीवन और कई पारंपरिक पर्व भी कृषि से जुड़े हैं। इसलिए खेती छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
किसानों की खुशहाली को बताया प्रदेश की समृद्धि का आधार
मुख्यमंत्री ने अन्नदाता किसानों के श्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि किसान केवल फसल नहीं उगाता। उसका परिश्रम पूरे समाज को सहारा देता है।
उन्होंने किसानों की खुशहाली को प्रदेश की समृद्धि से जोड़ा। साथ ही, किसानों के जीवन में सुख और खेतों में भरपूर फसल की कामना की।
खेती से मुख्यमंत्री का पुराना संबंध
मुख्यमंत्री का ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से पुराना रिश्ता रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद वे अपने गांव और खेतों से जुड़े रहते हैं।
बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाना इसी जुड़ाव को दर्शाता है। इस दौरान उन्होंने माटी, खेती और ग्रामीण जीवन के प्रति अपने लगाव को साझा किया।
विष्णुदेव साय किसान और कृषि परंपराओं का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती लोगों को मेहनत, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता सिखाती है। कृषि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि विकास के साथ अपनी कृषि परंपराओं को बचाए रखना जरूरी है। किसानों की मेहनत प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
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