कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती ही जा रही है। चिंता इस बात कि है कि आखिर कोरोना का यह नया वैरिएंट बच्‍चों को कितना प्रभावित करेगा।

Effects of coronavirus in children adds to list of Covid-19 unknowns |  Financial Times


वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने फिर चेताया है कि ओमिक्रान वैरिएंट से बच्चों और अनवैक्सीनेटेड लोगों में इंफेक्शन का खतरा अधिक है। साउथ अफ्रीका में ओमिक्रान के मामले बच्‍चों में भी बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वहां इस वैरिएंट से संक्रमितों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। 24 नंवबर को दक्षिण अफ्रीका में सामने आए इस नए वैरिएंट का संक्रमण भारत समेत दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में तेजी से फ़ैल रहा है।

Children and Coronavirus: Research Finds Some Become Seriously Ill - The  New York Times

बच्‍चों के लिए कितना खतरनाक है ओमिक्रोन

शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार साउथ अफ्रीका में ओमिक्रान आने के बाद से पांच साल से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण की दर बढ़ी है। वहां के नेशनल इंस्टीट्यूट फार कम्युनिकेबल डिजीज में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट वसीला जसत ने कहा कि इस लहर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की दर में वृद्धि हुई है। एनआइसीडी ने भी माना है कि यह संक्रमण पांच साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा तेजी से फैल रहा है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने चेताया है कि बच्चों के लिए वैक्सीनेशन शुरू किए जाने की जरूरत है, जो अभी काफी कम देशों में हो रही है। स्वामीनाथन का कहना है कि बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। बहुत ही कम देश बच्चों को टीका लगवा रहे हैं। केस यदि बढ़ता है तो बच्चों और अनवैक्सीनेटेड लोगों को संक्रमण का खतरा अधिक होगा। हम अभी भी बच्चों पर ओमिक्रोन के प्रभाव के अंतिम डेटा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रोन के अब तक के मामलों को देखकर यह बात सामने आई है कि यह अनवैक्सीनेटेड लोगों में तेजी से फैल रहा है। स्वामीनाथन ने कहा है कि कोरोना के नए वैरिएंट में डेल्टा की तुलना में पुनः इंफ्केशन होने का खतरा तीन गुना अधिक है। हालांकि, ओमिक्रान कितना घातक वैरिएंट है, इसे लेकर स्वामीनाथन ने कहा कि ओमिक्रान को लेकर अध्‍ययन जारी है और इसकी गंभीरता को पूरी तरह से समझने में दो-तीन हफ्ते और लगेंगे।