लोरमी के झझपुरी गांव में खेतों में धान का रोपा लगाते हुए महिलाएं ‘ददरिया’ गीतों के माध्यम से अपनी भावनाएं प्रकट कर रही हैं। एक तरफ मशीनों से आधुनिक खेती हो रही है, लेकिन यहां हल और मानव श्रम के भरोसे परंपरागत खेती होती दिख रही है। गीत “पवन के मंदिर, खाल्हे में धान के खेत” जैसे बोल महिलाओं के मन की पीड़ा और आशाओं को बयां कर रहे हैं।

ये महिलाएं बताती हैं कि खेती ही उनकी आजीविका है, बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें इसी आमदनी से चलती हैं।इन गीतों में सिर्फ सांस्कृतिक ध्वनि नहीं, बल्कि संघर्षों की आवाज और श्रम की महिमा भी सुनाई देती है।