ननिहाल छत्तीसगढ़ में वनवास के समय बिताएं पलों की दिलाएंगे याद
अयोध्या में भगवान श्री राम के बहुप्रतीक्षित मंदिर के शिलान्यास के बाद छत्तीसगढ़ यानी श्रीराम के ननिहाल में राम वन गमन पथ बनाने को लेकर राज्य सरकार बड़ा काम करने जा रही है। राज्य को दक्षिण कौशल राज्य भी कहा जाता है, इस लिहाज से छत्तीसगढ़ मां कौशल्या की भूमि है। प्रदेश सरकार ने मां कौशल्या के ऐतिहासिक मंदिर को भव्य तरीके से बनाने का प्लान तैयार कर रखा है। साथ ही कोरिया से लेकर सुकमा तक श्री राम वन गमन पथ मार्ग को बनाने का शंखनाद कर दिया है। इसके बनने से मुख्य मार्ग सहित 2 हजार किमी से अधिक की दूरी राममय होगी ।
राम वन पथ गमन के पहले चरण में 9 स्थानों को चिन्हित किया गया है। पर्यटन विभाग ने इतिहासकारों से चर्चा कर विभिन्न शोध और प्राचीन मान्यताओं के आधार पर छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के लिए 75 स्थानों को चिन्हित किया है। प्रथम चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया है। उनमें:
सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया)
रामगढ़ (सरगुजा)
शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)
तुरतुरिया, (बलौदाबाजार)
चंदखुरी (रायपुर)
राजिम (गरियाबंद)
सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी)
जगदलपुर (बस्तर)
रामाराम (सुकमा)
‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वन गमन पथ’ मेें 75 स्थानों का उल्लेख है। जिसमें से 51 स्थानों को डेवलप करने का सरकार ने निर्णय लिया है। चंदखुरी में माता कौशल्या के ऐतिहासिक मंदिर को भव्यता के साथ तैयार करना हमारे इतिहास को संजोने की दिशा में बेहद सुखद कदम है। राम वन गमन पथ में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा के दौरान पग-पग पर भगवान श्रीराम के दर्शन से जुड़े तथ्य देखने को मिलेंगे। मार्ग के किनारे जगह-जगह संकेतक, तीर्थ और पर्यटन स्थलों की जानकारी, भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं देखने और सुनने को मिलेगी।
राम वन गमन पथ का मैप
राम वन गमन पथराम वन गमन पथ के मुख्य मार्ग सहित कुल 2 हजार 260 किलोमीटर की लंबाई तक यह पथ राममय होगा। इस मार्ग के किनारे जगह-जगह भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं भी प्रदर्शित की जाएंगी। राम वन गमन पथ के दोनों ओर विभिन्न प्रजातियों के लाखों पौधे लगाए जाएंगे ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के दिलो-दिमाग में प्रभु श्री राम के वनवास का एहसास बना रहे।
परियोजना पर कार्य शुरू
137 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना पर कार्य शुरू हो गया हैं। इसकी शुरुआत रायपुर के पास मां कौशल्या मंदिर चंदखुरी से हो गई है। चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर है, जो सातवीं शताब्दी का है। माता कौशल्या मंदिर का डेवलपमेंट करने के लिए 154 करोड़ की योजना तैयार की गई है। कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से राम वन गमन पथ की शुरुआत होती है और सुकमा जिले के रामाराम में यह खत्म होती है, इस बीच की दूरी करीब 1400 किलोमीटर है।
प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल में 1400 किलोमीटर की पदयात्रा छत्तीसगढ़ में पूरी की थी।
पहले चरण 9 स्थान
राम वन गमन पथ पर पहले चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया है, उन सभी में आकर्षक लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। सभी स्थानों पर पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता के तहत किया जा रहा है। राम वन गमन परिपथ में कोरिया से लेकर सुकमा तक 100 किलोमीटर तक सूचनात्मक स्वागत द्वार स्थापित किए जाएंगे। यात्रियों को इससे पता चल सकेगा कि वे वन गमन के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं।
सभी पर्यटन केंद्रो में सूचना केंद्र
सभी पर्यटन केंद्रों में विशेष साज-सज्जा वाले पर्यटक सूचना केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे.राम वन गमन पथ का रूट मैप तैयार कर सभी विभागों को भी दिया गया है। चंदखुरी, शिवरीनारायण, तुरतुरिया और राजिम के लिए परियोजना की रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। शिवरीनारायण ब्रिज के ऊपर लेजर लाइट शो का भी इंतजाम किया जा रहा है।
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