आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ेंगे
शिक्षा, समाज और देश की प्रगति का सूचक है। बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते है। विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक एक कुम्हार की तरह तराश कर उनका भविष्य गढ़ते है। इसी कड़ी में बच्चों को निजी स्कूलों की तरह शिक्षा देने राज्य सरकार ने प्रदेश में 172 शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में सभी प्रकार की बेहतर व्यवस्था की गई है। वहां बच्चों का सर्वागीण विकास करना है। प्राचार्य और शिक्षकगण अपने ज्ञान का उपयोग बच्चों के भविष्य को संवारने में करें। इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो, कि बच्चे यहां पढ़ाई के लिए लालायित हो।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संवेदनशील सोच है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ सके। स्वामी आत्मानंद ने वनवासियों के उत्थान के लिए नारायणपुर आश्रम में उच्च स्तरीय शिक्षा केन्द्र की स्थापना की। इसी से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्वामी आत्मानंद के नाम से शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए है। प्रशिक्षण में प्राचार्यों को बहुत कुछ जानने और सीखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण निर्णय अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं की योजना है। उत्कृष्ट शालाएं सभी जिला मुख्यालय, नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्र में न्यूनतम एक होंगी। राज्य शासन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार बड़े शहरों में अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट स्कूल आगामी शिक्षा सत्र से प्रारंभ किया जाना है। ऐसे स्कूल अधिक से अधिक संख्या में हो, परन्तु प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा स्कूल अनिवार्य रूप से होगा। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक पढ़ाई होगी।
पंजीकृत संस्थाएं करेंगी संचालित
प्रदेश में प्रत्येक जिले, नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं का संचालन पंजीकृत सोसायटी के माध्यम से किया जाना है। संस्था संचालन के लिए पृथक से नियमावली तैयार की जानी है। हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं के संचालन के लिए प्रत्येक जिले में प्रत्येक शाला के लिए पृथक-पृथक सोसायटी का गठन किया जाएगा।
कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति
प्रत्येक जिले में प्रत्येक शाला के लिए पृथक-पृथक समिति होगी। समिति के सचिव जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग, आयुक्त नगर निगम-मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संस्था के प्राचार्य सदस्य होंगे। नये अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का संचालन एवं प्रबंधन कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति के जिम्मे होगी।
हर स्कूल का अलग सेटअप
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक स्कूल को इकाई मानते हुए प्रत्येक स्कूल के लिए पृथक-पृथक सेटअप की मंजूरी दी है। प्राचार्य का पद प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित है। इस पद पर संविदा नियुक्ति नहीं होगी। अन्य पदों को प्रतिनियुक्ति अथवा संविदा नियुक्ति से भरा जा सकेगा। प्रतिनियुक्ति की दशा में संबंधित कर्मचारियों को वही वेतन और भत्ते प्राप्त होंगे, जो उसके मूल विभाग से उन्हें प्राप्त होते थे, उन पर प्रतिनियुक्ति के प्रावधान भी लागू होंगे। संविदा नियुक्ति की अवस्था में शासन द्वारा निर्धारित एकमुश्त मानदेय दिया जाएगा।
संविदा पदों के लिए निर्धारित मानदेय
संविदा नियुक्ति की स्थिति में प्रत्येक व्याख्याता के लिए 38 हजार 100 रूपए, प्रधान पाठक प्राथमिक शाला को 35 हजार 400 रूपए, प्रधान पाठक मीडिल स्कूल को 38 हजार 100 रूपए, सहायक शिक्षक को 25 हजार 300 रूपए, शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक के लिए 33 हजार 400 रूपए, ग्रंथपाल को 22 हजार 400 रूपए, प्रयोगशाला सहायक और सहायक ग्रेड-2 को 25 हजार 300 रूपए, सहायक ग्रेड-3 के लिए 19 हजार 500 रूपए, भृत्य और चौकीदार को 15 हजार 600 रूपए का मानदेय तय किया गया है। शासन द्वारा प्रत्येक स्कूल के लिए इन पदों के साथ ही सभी स्कूलों में अंशकालीन सफाई कर्मचारी संबंधित जिले के अनुसार कलेक्टर दर पर भर्ती करने की स्वीकृति प्रदान की है।
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