छत्तीसगढ़ की नई फिल्म नीति को हरी झंडी मिल गई है। नई नीति के तहत छत्तीसगढ़ में फिल्म, धारावाहिक बनाने से लेकर सिनेमा घर खोलने तक में सरकार ने भारी-भरकम सब्सिडी देने पर मुहर लगा दी है।

छत्तीसगढ़ वैसे तो संसाधनों से भरपूर है। यहां का प्राकृति सौंदर्य लोगों को हमेशा आकर्षित करता है। पर्यटन की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं हैं। लेकिन इन सबके बाद भी हमारा छत्तीसगढ़ नक्सलगढ़ के रूप में जाना जाता है। ये बातें हर बार सामने आती है, प्रदेश का जिक्र होने पर लोग यही सोचते हैं। लेकिन हकीकत इससे उलट है। अब का बस्तर वो नहीं है जो देश-दुनिया के सामने पेश किया गया है। बस्तर अब बदल चुका है और इस बदलती तस्वीर का श्रेय यदि हम यहां की मौजूदा सरकार को दें तो ये शायद गलत नहीं होगा। बीते ढाई सालों में भूपेश सरकार ने राज्य को एक नई पहचान दी है। लगातार छत्तीसगढ़ को एक मजबूत, सशक्त और एक खूबसूरत प्रदेश के रूप में दिखाया जा रहा है। इसमें भूपेश सरकार का एक नया कदम छत्तीसगढ़ की तस्वीर में चार चांद लगाने वाला है। वो पहल है छत्तीसगढ़ की नई फिल्म नीति।

7 राज्यों के अध्ययन के बाद तैयार की गई इस नीति से ये उम्मीद है कि इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण के लिए निर्माता-निर्देशक आगे आएंगे। साथ ही यहां के कलाकारों के लिए नए रास्ते खुलेंगे। नई फिल्म नीति में अगर किसी ओटीटी फिल्म की 75 प्रतिशत शूटिंग राज्य में होती है तो सरकार इसके लिए 1 करोड़ रुपए देगी। क्या सरकार की ये पहल सराहना के काबिल नहीं है?

सिनेमाघरों को पुनर्जीवित करने की पहल

कोरोना काल में सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल बंद हो चुके हैं। सरकार इन्हें पुर्नजीवित करने के लिए आगे आई है। इसके तहत नए सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल खोलने के लिए 15 लाख से मल्टीप्लेक्स के लिए 50 लाख रुपए सहायता देने का प्रावधान किया है। पुराने बंद पड़े सिनेमा हॉल को रिनोवेट करने के लिए 10 लाख की सब्सिडी मिलेगी।

मशीन, उपकरणों पर भी सब्सिडी

सरकार ने स्थानीय फिल्म, धारावाहिक निर्माताओं को बढ़ावा देने के लिए उनके द्वारा खरीदे जाने वाले फिल्म निर्माण संबंधित उपकरण, मशीनें, कैमरा अन्य सामग्री खरीदी पर 15 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया है। बेशक ये सरकार की एक अच्छी पहल है। इससे छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान जरूर मिलेगी। देश के सामने भी छत्तीसगढ़ संस्कृति का एक नया आयाम बनकर उभरेगा।