डायन’ एक ऐसा शब्द जिसे सुन के ही मन में एक डर् पैदा हो जाता है , हाला की इसे अंधविश्वास माना जाता है पर अगर इसके बारे में जाने तो ये कही ना कही सच्चाई नजर जरूर आती हैं । अगर साइकोलॉजी की माने तो एक बाएपोलार डिसऑर्डर होता हैं जिसमें प्रभावित इंसान में दो लोगो की छवि नजर आती है।


तो चलिए हम आपको एक ऐसी ही सच्चाई से रूबरू कराते है, गलत काम को अंजाम देने के लिए डायन की पूजा करने की बातें आप खूब सुने होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक अनोखा मंदिर है, जहां डायन की पूजा अच्छे काम के लिए की जाती है वह मंदिर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ‘डायन’ का एक प्राचीन मंदिर है । जिसे छत्तीसगढ़ बोली में लो परेतिन दाई नाम से जाना जाता हैं । स्थानीय लोग ग्रामीण मंदिर को लेकर कई रोचक जानकारियां बताते हैं । वह के लोग बताते हैं कि पहले यह मंदिर नीम के पेंड के नीचे सिर्फ चबूतरानुमा था, लेकिन धीरे-धीरे मान्यता और प्रसिद्धि बढ़ती गई और जन सहयोग से मंदिर का निर्माण कर दिया गया।मंदिर का निर्माण डायन देवी को अर्पित ईंटों से कराया गया है ।

बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड में एक गांव है झींका ,गांव की मुख्य सड़क से ही लगा डायन देवी का मंदिर है। ग्रामिणी लोग बताते हैं कि देवी के प्रति आस्था या लोगों में डर ऐसा है जानकारी के बाद भी अगर कोई यहां से सर झुकाए आगे बढ़ा तो उसे आगे परेशानी का सामना जरूर करना पड़ता है। ग्रामीण रोशन बताते हैं कि पहले कई लोग जानकारी के बाद भी अनदेखा कर आगे बढ़ जाते थे। ऐसे लोगों को आगे रास्ते में कुछ न कुछ परेशानी जरूर होती थी। इसके बाद अब लोग बगैर सर झुकाए आगे नहीं बढ़ते हैं।
और तो और ग्रामीणों का यह भी मानना है कि इस मंदिर में बगैर दान किए कोई भी मालवाहक वाहन आगे नहीं बढ़ता है अगर बिना दान के आगे बढे तो उसके साथ दुर्घटना हो जाती है। मंदिर के सामने से गुजरना है तो वहां कुछ भी दान करना अनिवार्य है। आप मालवाहक वाहन से जा रहे हैं तो वाहन में जो भी सामान भरा है, उसमें से कुछ-न-कुछ चढ़ाना अनिवार्य है। चाहे ईंट, पत्थर, पैरा, हरी घास, मिट्टी, सब्जी, भाजी ही न हो। उनका कहना है वहां कि मान्यता का पालन करें।

डायन देवी के मंदिर में ईंट का चढ़ाई बड़े पैमाने पर होता है. ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर में ईंट इतनी ज्यादा संख्या में चढ़ता है कि चढ़ावे के ईंट से ही गांव में दूसरे विकास निर्माण कार्य जैसे चबूतरा, नाली निर्माण जैसे काम कर लिए जाते हैं।
ग्रामीण सोनू बताते हैं कि परेतिन देवी किसी भी व्यक्ति का बुरा नहीं करती हैं. मंदिर में राहगीरों सहित सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि दोनों नवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में ज्योतिकलश प्रज्ज्वलित करवाते हैं. लेकिन जानबूझकर कोई डायन देवी को अनदेखा करता है तो नुकसान होता है।
ग्रामीण के लोगों ने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है और इसकी बड़ी मान्यता है। गांव में भी बहुत से ठेठवार हैं, जो रोज दूध बेचने आसपास के इलाकों में जाते हैं। यहां दूध चढ़ाना ही पड़ता है, जान बूझकर दूध नहीं चढ़ाया तो दूध खराब हो जाता है।

यह हैरान कर देने वाला रहस्य था।