रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्म संसद का आयोजन होने जा रहा है। आगामी 25 और 26 दिसंबर को रायपुर के रावणभाठा मैदान में धर्म संसद आयोजित की जाएगी। इसमें धर्मांतरण, सनातन धर्म के दुष्प्रचार पर रोक और अन्य टिप्पणियों पर देशभर के साधु-संत, धर्माचार्य, पुरोहित अपना पक्ष रखेंगे। इस बैठक में कई अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।
धर्म संसद को लेकर महंत रामसुंदर दास ने कहा कि इसमें विभिन्न धर्माचार्यों को बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि रायपुर में पहली बार धर्म संसद का आयोजन वर्ष 1974 में हुआ था। इसमें करपात्री महाराज और चारों शंकराचार्य शामिल हुए थे। उस समय माता सीता की अग्नि परीक्षा को लेकर टिप्पणी की गई थी।
हिंदुओं को जागरूक करना उद्देश्य
बता दें कि इस आयोजन के मुख्य संरक्षक दूधाधारी मठ के महंत राम सुंदर दास होंगे। उन्होंने बताया कि धर्म संसद 2021 करवाने का उद्देश्य अलग-अलग संगठनों में बिखरे हुए हिंदुओं को एक मंच में लाना है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए हिंदुओं को जागरूक करना है। धर्म संसद के जरिए और महात्माओं द्वारा हिंदू समाज के लोगों को अपने समाज, अपने सनातन धर्म के प्रति कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा।
वर्तमान स्थिति पर होगी चर्चा
महंत रामसुंदर दास ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए संत महात्मा लगातार प्रयास करते हैं। आने वाले दिनों में सनातन धर्म पर पड़ने वाले खतरे को देखते हुए धर्म संसद में चर्चा की जाएगी। पड़ोसी देशों में बसे सनातनियों पर लगातार आक्रमण से पड़ने वाले प्रभावों पर भी धर्म संसद में चर्चा की जाएगी।
संत महात्मा करेंगे मार्गदर्शन
श्री नीलकंठ सेवा संस्थान के संस्थापक पं. नीलकंठ त्रिपाठी ने बताया कि अब समय आ गया है कि भारत देश के समस्त सनातनियों को एकत्रित किया जाए। इस धर्म संसद के माध्यम से देश हित के लिए कार्य करने का संतों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। संत महात्माओं को सनातन धर्म के लिए आगे कर सनातन धर्म के विस्तार और रक्षा के लिए कार्य किया जाएगा।
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