रायपुर। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज 71वीं पुण्यतिथि है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। सीएम ने उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।
सीएम बघेल ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल ने अग्रणी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के लिए किए संघर्ष के दौरान उन्होंने कई आंदोलनों का कुशल नेतृत्व किया। आजादी मिलने के बाद उन्होंने देश की रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर देश के एकीकरण में अविस्मरणीय योगदान दिया। अपने फौलादी इरादों के कारण वे लौह पुरुष के नाम से जाने जाते हैं।


रियासतों का विलय
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा में हुआ था। उन्होंने ने 562 देशी रियासतों का भारत में विलय करवाया था। भारत को एक राष्ट्र बनाने में वल्लभ भाई पटेल की खास भूमिका रही। सरदार पटेल के विचार आज भी लोगों को प्ररित करते हैं। वे 15 अगस्त, 1947 से लेकर 15 दिसंबर, 1950 तक देश के पहले गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री रहे। 15 दिसंबर 1950 को 75 वर्ष की उम्र में मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।
जिलाधिकारी की परीक्षा में हासिल किए
सरदार पटेल ने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। जिसके चलते वे स्कूली शिक्षा के आगे पढ़ नहीं पाए। बाद में उन्होंने किताबें लेकर घर पर ही जिलाधिकारी की परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी। मेहनत और लगन का परिणाम हमेशा अच्छा होता है और पटेल के साथ भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने इस परीक्षा में सर्वाधिक नंबर प्राप्त किए और 36 साल में वह इंग्लैंड चले गए, जहां उन्होंने वकालत की पढ़ाई की।
मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित
भारत की आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता के बाद पूरे देश को एकजुट करने में सरदार पटेल का योगदान असाधारण है। साल 1991 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया था। उन्होंने पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया था।
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