• भूपेश सरकार ने खेती-किसानी को लाभकारी बनाने का लिया फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए मेहनतकश किसानों-ग्रामीणों और मजदूरों के दुख-दर्द समझने वाली सरकार के रूप में राज्य ने देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में किसान हितैषी फैसलों से भूपेश सरकार के 36 महीने में कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं। छत्तीसगढ़ के मौसम और जलवायु के साथ-साथ लगभग 80 प्रतिशत लोगों की खेती-किसानी पर निर्भरता को देखते हुए नई सरकार ने खेती-किसानी को लाभकारी बनाने का फैसला लिया। इतना ही नहीं इस सरकार ने किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी देने का फैसला भी लिया। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में इन 36 महीनों में समर्थन मूल्य में धान खरीदी का साल दर साल नए कीर्तिमान बनते गए।

छत्तीसगढ़ में किसानों को जीरो परसेंट ब्याज पर खेती-किसानी के लिए सहकारी समिति से ऋण और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ-साथ इनपुट सब्सिडी देने का नतीजा ये हुआ कि जो किसान खेती-किसानी छोड़ चुके थे, अब सरकार की योजनाओं से वे पुन: खेती-किसानी की ओर लौटने लगे हैं। राज्य में कुल कृषि का रकबा बढ़कर 29.85 लाख हैक्टेयर हो गया है। किसानों की माली हालत में भी सुधार हुआ है। राज्य के किसान अब बेहतर ढंग से खेती-किसानी करने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी

किसानों को त्वरित भुगतान

खरीफ विपणन वर्षा 2021-22 में राज्य में 24 लाख 9 हजार 453 किसानों ने पंजीयन कराया है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में चालू खरीफ सीजन में 105 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने किसानों से न केवल खरीदी की सुनिश्चित व्यवस्था की है, बल्कि उन्हें तत्काल भुगतान की व्यवस्था भी की है। किसानों को उनके बैंक खातों के जरिए ऑनलाईन भुगतान किया जा रहा है। धान खरीदी को लेकर किसी भी किसान को दिक्कत न हो इसके लिए सभी कलेक्टरों को निदेश दिए गए हैं।

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किसानों की सुविधाओं का रखा ध्यान

किसानों-ग्रामीणों की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस साल 88 नए धान खरीदी केंद्र भी बनाए हैं। इस साल 2 हजार 399 धान खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को धान खरीदी केंद्रों में भीड़भाड़ और लंबी लाइन से निजात मिलेगी। वहीं परिवहन का खर्च भी कम होगा।

धान खरीदी

धान और मक्का खरीदी एक साथ

चालू खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के तहत समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की नकद और लिंकिंग के जरिए खरीदी 1 दिसंबर 2021 से 31 जनवरी 2022 तक और मक्का की खरीदी 1 दिसंबर 2021 से 28 फरवरी 2022 तक की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के लिए औसत अच्छी किस्म के धान के लिए समर्थन मूल्य की दर, धान कॉमन 1940 रुपये प्रति क्विंटल, धान ग्रेड ए 1960 रुपये प्रति क्विंटल और औसत अच्छी किस्म के मक्का का समर्थन मूल्य 1870 रुपये प्रति क्विंटल का दर निर्धारित है।

विभिन्न फसल ले रहे किसान

भूपेश सरकार द्वारा खेती-किसानी को लगातार बढ़ावा देने के परिणामस्वरुप इस साल खरीफ सीजन में करीब 48 लाख 20 हजार हैक्टेयर से ज्यादा रकबे में अलग-अलग फसलों की बोनी हुई है। इनमें धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, सोयाबीन की फसल शामिल है। राज्य में 3.42 लाख हैक्टेयर में दलहन, 2 लाख हेक्टेयर में तिलहन, 1.50 लाख हैक्टेयर में साग-सब्जियों की खेती की गई है।

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साल दर साल बढ़ा धान खरीदी का लक्ष्य

भूपेश सरकार के 36 महीने के कार्यकाल में किसान हितैषी नीतियों से खेती-किसानी खूब फली-फूली और समृद्ध हुई है। पहले साल भूपेश सरकार ने करीब 83 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा। इसी तरह दूसरे साल 92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया। अब इस साल 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य सरकार ने रखा है। सरकार के इन नीतिगत फैसलों और कार्यों से समाज के सभी वर्गो का न्याय के साथ निरंतर विकास हो रहा है। गरीब, मजदूर, किसान, व्यापारी इन सभी वर्गो के हित में किए जा रहे कार्यों से नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का सपना साकार हो रहा है।