कांग्रेस विधायकों के कामकाज व सक्रियता पर रखी जा रही नजर

रायपुर। राज्य में कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। इसके साथ ही सरकार और प्रदेश कांग्रेस 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों से लेकर विधायकों और मंत्रियों तक के कामकाज व सक्रियता पर नजर रखी जा रही है। इसी कड़ी में प्रभारी मंत्रियों के कामकाज का भी आकलन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत निकाय के चुनाव के नतीजे से होगी। सभी को बेतहर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 30 नवंंबर को हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि निकाय चुनाव में पूरी जिम्मेदारी जिला प्रभारी मंत्रियों को दे दी जाए। इस कारण प्रदेश चुनाव समिति की बैठक के बाद जिला प्रभारी मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिले के जिस निकाय में चुनाव हो रहा है, वहां कांग्रेस प्रत्याशियों का प्रचार और उनके लिए चुनावी रणनीति बनाने में पूरी गंभीरता के साथ जुट गए थे।

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नतीजे के बाद काम की समीक्षा

पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि निकाय चुनाव में जिला प्रभारी मंत्रियों और क्षेत्रीय विधायकों को ऐसे काम करने के निर्देश दिए गए थे, जैसे वे खुद चुनाव लड़ते हैं। तब जितनी मेहनत करते हैं, उतनी ही मेहनत निकाय चुनाव में अपने प्रभार या प्रभाव वाले निकाय क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी के लिए करने को कहा गया था। जब जिम्म्मेदारी दी गई थी तो नतीजे आने के बाद उनके काम का भी आकलन किया जाएगा।

सत्ता संगठन के बीच समन्वय

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संकेत दिए हें कि सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। अब मंत्रिमंडल में फेरबदल किए जाएंगे। समझाा जा रहा हँै कि निकाय चुनाव में 15 निकायों में विधायकों के पसंद के आधार पर टिकट बांटे हें। अब उनकी ही जिम्म्ेदारी हे कि जिन लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है उन्हें जीताकर लाएं। इसी आधार पर मंत्रियों की भी जिलों में पकड़ को देख उनकी चमता का आंकलन किया जाएगा। 23 दिसंबर को नतीजे आने के बाद संगठन इसकी समीक्षा कर सरकार कको इसकी रिपोर्ट देगी।