देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ICU (गहन चिकित्सा इकाई) सेवाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे तय दिशानिर्देशों के आधार पर एक ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करें।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ICU सेवाओं के लिए बनाए गए मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद जरूरी है। इसके लिए हर राज्य को न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों को प्राथमिकता देनी होगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। इसी के तहत निगरानी तंत्र को मजबूत करने और नियमित समीक्षा की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक सप्ताह के भीतर बैठक आयोजित करें और विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिससे पूरे देश में ICU सेवाओं का स्तर एक समान किया जा सके।
सुनवाई के दौरान नर्सिंग स्टाफ की भूमिका को भी अहम बताया गया। कोर्ट ने ICU प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत पर सहमति जताई और भारतीय नर्सिंग परिषद को इस मामले में शामिल किया।
अदालत ने संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रणाली में सुधार की योजना पेश करें, ताकि स्वास्थ्यकर्मी गंभीर मरीजों की देखभाल में अधिक सक्षम हो सकें।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देश की स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे ICU सेवाएं अधिक प्रभावी, सुरक्षित और सुलभ बन सकेंगी।
