छत्तीसगढ़ में पखवाड़े भर से चल रहा मुख्यमंत्री की कुर्सी का खेल निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आखिर सीएम भूपेश (दाऊ) ने ये बता ही दिया कि वही किंग मेकर हैं। दिनभर की दौड़ के बाद तमाम विधायकों के लिए दिल्ली की शाम सुकून लेकर आई। कमरे से एक के बाद एक बाहर निकलते विधायकों के चेहरों पर संतोष था। मानों जैसे सभी का दिल्ली जाना सफल हो गया हो।

विधायक से लेकर निगम मंडल के पदाधिकारी, नगर निगमों के महापौर सभी 24 अकबर रोड में इकट्ठा थे, तो दूसरी तरफ टीम के कप्तान और प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल प्रदेश प्रभारी के साथ सफदरजंग रोड में छत्तीसगढ़ के विकास पर चर्चा कर रहे थे और 3 घंटे तक इस पर चर्चा होती रही।

पूरा दिन विधायकों और कांग्रेस के तमाम नेताओं ने बातचीत की, चाय की चुस्कियों में सारी आशंकाओं और संभावनाओं पर चर्चा होती रही। पीएल पुनिया से मुलाकात के कांग्रेस विधायक वरिष्ठ नेता वेणुगोपाल से भी मिले। सभी ने राहुल गांधी से भी मिलने का समय मांगा था, हालांकि विधायकों की ये इच्छा अधूरी रह गई। लेकिन जल्द ही विधायकों की ये ख्वाहिश छत्तीसगढ़ में ही पूरी होने वाली है।

चर्चा के दौरान दाऊ ने भी अपने दिल की बात अपने नेता से कही। सीएम भूपेश ने छत्तीसगढ़ की तमाम राजनीतिक स्थितियों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को दी। इसी बीच मौके पर चौका मारते हुए उन्होंने राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ आने का न्योता भी दे दिया। राहुल गांधी ने भी इसके लिए हामी भर दी। ये सब बातें जब बंद कमरे से बाहर आई तब वहां मौजूद सारे नेता एक दूसरे को बधाई देते दिखे और माहौल ऐसा हो गया मानों जैसे दाऊ ने फिर से सीएम पद संभाला हो।

इस पूरे वाक्ये के दौरान सरगुजा नरेश नदारद रहे। या यूं कह लें कि उन्होंने इन तमाम स्थितियों से दूरी बनाई हुई थी। इस दंगल में भी एक बार फिर बाबा अकेले दिखाई पड़े और हो भी क्यों ना, जब कोई अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करेगा तो हो सकता है कि अपने आप को इस खेल में यूं ही अकेला ही पाएगा।

हालांकि दाऊ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो ही विधायक दल के नेता हैं। जिस तरह से उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का काम किया, जिस तरह से वे कांग्रेस के लिए संजिवनी बने, तो ये पद उन्हें शोभा देता है। आखिर मेहनत और परिश्रम का फल मिलना ही चाहिए।