छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ाने में सहायक होगी फिल्म नीति

छत्तीसगढ़ की नई फिल्म नीति बनने के बाद इसकी चर्चा पूरे देश में होने लगी है। नए राज्य में जिस तरह से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को पिरोते हुए प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘कहि देबे संदेश’ बनाई गई थी। ‘कहि देबे संदेश’ का निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था। मनु नायक की इस फिल्म के बाद अन्य लोगों ने इस दिशा में प्रयास करना शुरू किया। इसके बाद दूसरी फिल्म ‘घर द्वार’ का निर्माण 1971 में विजय कुमार पांडेय ने किया। इसके बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म को सिनेमा घरों में रिसपॉन्स न मिलने से इसके निर्माण करने वाले हतोत्साहित होने लगे।

यहां पर कला के पारखी कलाकार होने के बाद भी अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने की ललक के बाद भी लगभग 30 साल बाद राज्य बनने के समय निर्माता और निर्देशक सतीश जैन की फिल्म ‘मोर छईंया भुईंयां’ पर्दे पर आई। यह तीसरी छत्तीसगढ़ी फिल्म थी। ये फिल्म अपने गाने और डायलाग से सिनेमा हाल में सुपर डूपर रही। राज्य बनने के अवसर पर बनी फिल्म को प्रमोट करने में सरकार और मीडिया के लोगों का काफी योगदान रहा।

वर्तमान सरकार ने बढ़ाया कदम

इसका ही परिणाम था कि अब छॉलीवुड में एक दर्जन से ज्यादा फिल्म निर्माता इसे आगे बढ़ाने में लगे हैं। मध्यप्रदेश के समय बनी इस फिल्म के निर्माण के समय निर्माताओं को शुटिंग और इसके शेट के लिए बाहर जाना पड़ता था। राज्य के कई ऐसे स्पॉट हैं जो पर्यटन और प्राकृतिक दृष्टि से काफी समृद्ध होने के बाद भी सामने नहीं लाए जा सके। राज्य में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार मांग उठने लगी। पूर्ववर्ती सरकार ने इसके लिए प्रयास किया। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बीस साल बाद यह समय आया है, जब राज्य सरकार ने नई फिल्म नीति को मूर्त रूप दिया और नई फिल्म नीति तैयार की गई। नया रायपुर में फिल्म सिटी बनाने के लिए जमीन की स्वीकृति दे दी गई है। करीब 150-200 एकड़ जमीन पर फिल्म सिटी बनाने सरकार प्रयास कर रही है।

संस्कृति को पोषित करने बनी योजना

राज्य की नई फिल्म नीति आने के पहले संस्कृति विभाग से फिल्म बनाने वालों को अनुमति में देरी होती थी। पर्यटन स्थलों पर शुटिंग के लिए स्थानीय प्रशासन की भी अनुमति के साथ अन्य जरूरी अनुमति आवश्यक थी। अब राज्य की सरकार रूचि को देखते हुए फिल्म बनाने वालों को फ्री में सभी सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्हें केवल अपने सेट और शुटिंग के अनुसार अपनी व्यवस्था स्वयं करनी होगी। संस्कृति विभाग अब मुफ्त शूटिंग की योजना तैयार की है। योजना को लेकर छत्तीसगढ़ी की एक दर्जन से अधिक फिल्मों, टीवी सीरियलों के निर्देशकों ने अब तक पंजीयन करवाया है। विभाग का उद्देश्य पर्यटन केंद्रों, लोक कला, कलाकारों और छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाना है।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर शूटिंग फ्री

छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री को मुंबई, हैदराबाद, चेन्न्ई, कोलकाता जैसी फिल्म इंडस्ट्री की तरह स्थापित करने की दिशा में प्रयास होने लगा है। ज्यादा से ज्यादा निर्माता, निर्देशक अपनी फिल्मों की शूटिंग करने छत्तीसगढ़ आ सकें, इसके लिए अब मुफ्त शूटिंग करने की इजाजत भी दिए जाने की पहल की जा रही है। पहले छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर शूटिंग करने के लिए लाखों रुपये खर्च होता था। अब संस्कृति विभाग ने इसे मुफ्त कर दिया है। कहीं भी शूटिंग करने का एक रुपये भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। देश भर के निर्माता, निर्देशक अपनी फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियल की शूटिंग करने के लिए संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर घर बैठे अनुमति हासिल कर सकेंगे।

प्राकृतिक स्थलों को मिलेगी पहचान

छत्तीसगढ़ में अनेक पर्यटन केंद्र और खूबसूरत वादियां हैं, जिनके बारे में अन्य प्रदेशों के लोग नहीं जानते। जब बाहरी निर्माता-निर्देशक छत्तीसगढ़ में आकर शूटिंग करेंगे तो उन फिल्मों, वेब सीरिजों के जरिए छत्तीसगढ़ की हरियाली, खूबसूरती और ऐतिहासिक स्थलों का नजारा देशभर के लोग ले सकेंगे। इससे छत्तीसगढ़ आने के लिए पर्यटक प्रेरित होंगे। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के बारे में देश-विदेश के लोग जान सकेंगे।

स्थानीय कलाकारों को लाभ

संस्कृति विभाग का मानना है कि मुफ्त शूटिंग की योजना से भविष्य में अन्य राज्यों से निर्देशक, कलाकार आएंगे। इससे स्थानीय कलाकारों को भी अभिनय एवं अन्य तकनीकी क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिलेगा। पिछले दो साल से कोरोना महामारी के कारण फिल्म व्यवसाय ठप है और कलाकार निराश हैं। यदि पर्यटन केंद्रों में शूटिंग होती है तो वहां के आसपास के लोगों का भी व्यवसाय बढ़ेगा।