नो कॉस्ट EMI फेस्टिव शॉपिंग क्रेडिट कार्ड

नवरात्रि और दिवाली नजदीक आते ही हर वेबसाइट और ऐप पर नो-कॉस्ट EMI के ऑफर दिखने लगते हैं. देखने में यह बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन नो-कॉस्ट EMI लेने से पहले कुछ जरूरी बातें समझना जरूरी है. जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में जेब पर भारी पड़ सकता है. यहां जानिए फेस्टिव शॉपिंग के दौरान EMI चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

नो-कॉस्ट EMI का सच क्या है

नो-कॉस्ट EMI लेते ही उस खरीदारी की पूरी रकम आपकी क्रेडिट लिमिट में ब्लॉक हो जाती है. इसका मतलब है कि बाकी जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध क्रेडिट लिमिट कम हो जाती है. इसके अलावा, कई बार EMI की “नो-कॉस्ट” लागत असल में प्रोडक्ट की कीमत में पहले से ही जोड़ दी जाती है या प्रोसेसिंग फीस के तौर पर वसूली जाती है.

शॉपिंग से पहले ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

  • प्रोसेसिंग फीस और जीएसटी जैसे छिपे हुए चार्ज पहले से चेक कर लें, ये अक्सर फाइन प्रिंट में लिखे होते हैं
  • अगर पैसा उपलब्ध है तो पूरी रकम एक साथ चुकाना अक्सर बेहतर विकल्प होता है, क्योंकि नगद भुगतान पर 8 से 10% तक कैशबैक या डिस्काउंट भी मिल सकता है
  • EMI बीच में बंद करने पर फोरक्लोज़र फीस लग सकती है, इसलिए शुरुआत में ही यह जानकारी ले लें
  • एक भी EMI किस्त मिस होने पर लेट फीस, ब्याज और सिबिल स्कोर पर नकारात्मक असर तीनों झेलने पड़ सकते हैं

इम्पल्स शॉपिंग से कैसे बचें

EMI की सुविधा आसान होने की वजह से बिना जरूरत के सामान खरीदने की आदत बढ़ जाती है. शॉपिंग शुरू करने से पहले एक बजट तय कर लें और उसी लिस्ट पर टिके रहें. यह आदत फेस्टिव सीजन के बाद के महीनों में आर्थिक तनाव से बचाने में मदद करती है.

बजट प्लानिंग के लिए आसान टिप्स

खर्च का हिसाब रखने के लिए एक साधारण नोटबुक या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है. कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स का फायदा तभी लें जब वह आपकी असली जरूरत के सामान पर मिल रहा हो, सिर्फ ऑफर के लालच में अतिरिक्त सामान न खरीदें. क्रेडिट लिमिट का ज्यादातर हिस्सा एक साथ इस्तेमाल करने से बचना भी फाइनेंशियल हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है.

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य फाइनेंशियल जागरूकता के लिए है, यह निवेश या फाइनेंशियल सलाह नहीं है. बड़े खर्च या EMI से जुड़े फैसले लेने से पहले प्रमाणित फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.

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