कोलेस्ट्रॉल का नया कारण समझाता इलस्ट्रेशन, जिसमें लिवर कोशिका की सतह पर LDL रिसेप्टर और खून में कोलेस्ट्रॉल के कण हैं

ब्लड टेस्ट में LDL यानी ‘बैड’ कोलेस्ट्रॉल बढ़ा आए, तो सबसे पहले खाने पर सवाल उठता है. अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे का कोलेस्ट्रॉल का नया कारण पकड़ा है. अमेरिका की यूसी सैन डिएगो की टीम ने दिखाया कि ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल वाला खाना लिवर की एक खास ‘सफाई व्यवस्था’ को कमज़ोर करता है. यह स्टडी प्रतिष्ठित जर्नल Nature में छपी है.

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे वैज्ञानिकों को क्या नया मिला

वैज्ञानिकों ने पाया कि खाने का ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल Ral नाम के प्रोटीन को सक्रिय करता है. इसके बाद कैथेप्सिन ए यानी CTSA नाम का एंज़ाइम लिवर के LDL रिसेप्टर घटाने लगता है. यही रिसेप्टर खून से बैड कोलेस्ट्रॉल हटाते हैं. चूहों में CTSA रोकने पर LDL काफी घटा, पर इंसानों पर परीक्षण बाकी है.

Nature वाली इस रिसर्च के अहम तथ्य

  • किसने की: यूसी सैन डिएगो स्कूल ऑफ मेडिसिन, वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर एलन सॉल्टील.
  • कहां छपी: Nature जर्नल, 2026 का अंक 656.
  • किस पर हुई: चूहों और इंसानी कोशिकाओं पर, इंसानों पर नहीं.
  • दवा का संकेत: CTSA रोकने वाली एक प्रायोगिक दवा पहले दिल की बीमारी के लिए सुरक्षा ट्रायल पार कर चुकी है.
  • फंडिंग: अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) और अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन.

लिवर कोलेस्ट्रॉल को खून से कैसे हटाता है

हमारा लिवर खून की सफाई करने वाले फिल्टर की तरह भी काम करता है. इसकी कोशिकाओं की सतह पर LDL रिसेप्टर होते हैं. ये रिसेप्टर खून में घूमते LDL कोलेस्ट्रॉल को पकड़कर अंदर खींच लेते हैं.

सीधी सी बात है कि जितने ज़्यादा रिसेप्टर, उतनी अच्छी सफाई. इसलिए अगर रिसेप्टर घट जाएं, तो LDL खून में ज़्यादा देर टिका रहता है. यही धीरे-धीरे नसों में जमाव का खतरा बढ़ाता है.

दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टर दशकों से जानते थे कि ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल वाला खाना लिवर की यह क्षमता घटाता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है, यह साफ नहीं था. यह स्टडी उसी अधूरी कड़ी को जोड़ती है.

कोलेस्ट्रॉल का नया कारण कैसे काम करता है

सबसे पहले खाने से आया अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल लिवर में Ral प्रोटीन को जगाता है. इसके बाद एक के बाद एक संकेत आगे बढ़ते हैं. आखिर में CTSA एंज़ाइम LDL रिसेप्टर को तोड़ने की प्रक्रिया तेज़ कर देता है.

फिर वैज्ञानिकों ने चूहों को CTSA रोकने वाली दवा दी. नतीजतन उनके LDL रिसेप्टर टिके रहे और खून में LDL कोलेस्ट्रॉल काफी कम हुआ. हालांकि प्रेस रिलीज़ में यह नहीं बताया गया कि गिरावट कितने प्रतिशत की थी.

मौजूदा दवाओं से यह खोज अलग क्यों है

स्टैटिन और PCSK9 इनहिबिटर जैसी दवाएं भी आखिरकार LDL रिसेप्टर की संख्या बचाकर या बढ़ाकर काम करती हैं. लेकिन नया रास्ता इन दवाओं के निशाने से बिल्कुल अलग है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे भविष्य का अतिरिक्त विकल्प मान रहे हैं.

दरअसल कुछ मरीज़ मौजूदा दवाओं के बावजूद सुरक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाते. प्रोफेसर सॉल्टील के मुताबिक ऐसे लोगों के लिए नए विकल्पों की ज़रूरत बनी हुई है. फिर भी यह विकल्प अभी कागज़ और प्रयोगशाला तक ही है.

प्रयोगशाला से मरीज़ तक पहुंचने में क्या बाकी है

किसी नई दवा को बाज़ार तक पहुंचने के लिए कई चरण पार करने होते हैं. फेज़ 1 में देखा जाता है कि दवा इंसानों के लिए सुरक्षित है या नहीं. इसके बाद फेज़ 2 में छोटे समूह पर असर परखा जाता है. फिर फेज़ 3 में हज़ारों मरीज़ों पर बड़ा ट्रायल होता है.

यहां फायदा यह है कि CTSA रोकने वाली दवा का फेज़ 1 पहले हो चुका है. इसलिए शोधकर्ता उम्मीद कर रहे हैं कि कोलेस्ट्रॉल के लिए फेज़ 2 ट्रायल जल्दी शुरू हो सकता है. हालांकि ऐसा कोई ट्रायल शुरू होने की घोषणा अभी नहीं हुई है. यानी कोलेस्ट्रॉल का नया कारण पता चलना और उसका इलाज मिलना, दो अलग बातें हैं.

अभी आपके लिए इस खबर का क्या मतलब है

भारत में यह सवाल छोटा नहीं है. ICMR-INDIAB स्टडी के मुताबिक करीब 87.3% वयस्कों में खून की चर्बी का कम से कम एक पैमाना गड़बड़ मिला. ऐसे में कोलेस्ट्रॉल का नया कारण जानना दिलचस्प है, पर रोज़ की सावधानी वही रहेगी.

  • अपनी कोलेस्ट्रॉल की दवा इस खबर के आधार पर बंद या कम न करें.
  • 20 साल के बाद समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने के बारे में डॉक्टर से पूछें.
  • तला-भुना, वनस्पति घी और ज़्यादा मक्खन-मलाई सीमित करें.
  • साबुत अनाज, दालें, सब्ज़ियां और फल थाली में बढ़ाएं.
  • रोज़ कम से कम 30 मिनट तेज़ चलें और धूम्रपान से दूर रहें.

ध्यान रहे कि WHO के मुताबिक बढ़ा कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी और स्ट्रोक का बड़ा जोखिम है. इसलिए जांच और इलाज में देरी न करें.

कोलेस्ट्रॉल का नया कारण विज्ञान की अहम खोज है. लेकिन इलाज बनने में अभी कई ट्रायल और सालों का समय लग सकता है.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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