अब तक 2780 करोड़ के 15 एमओयू किए गए
रायुपर। छत्तीसगढ़ में धान का उत्पादन बहुतायत होता है। राज्य सरकार किसानों से धान चारीदी करती है,इसमें से केद्रीय ओर राज्य में चावल देने के बाद करीब 20 लाख टन से अधिक धान बच जाता है। राज्य सरकार इस धान का उपयोग बायो एथेनॉल बनाने में करने नई औद्योगिक नीति में उत्पादन इकाई लगाने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। प्रदेश में 100 करोड़ की पूंजी निवेश करने वाली औद्योगिक इकाईयों को बेस पोक पॉलिसी के तहत विशेष सुविधा लिए जाने का निर्णय लिया गया है।

राज्य की नीति से उत्साहित होकर 15 औद्योगिक समूहों ने रूचि दिखाइ्र है। इन औद्योगिक समूहों के साथ 2780 करोड़ रुपए का एमओयू किया गया है। इन इकाईयों से 2370 केडीएल एथेनॉल और इएनओ का उत्पादन होने की संभावना है। इन इकाईयों में धान, मक्का ओर गन्ना से एथेनॉल बनाया जाएगा। इन इकाईयों को कइ्र तरह के छूट देने का ऐलान भी किया गया है। प्रदेश में बायोफ्यूल के उत्पादन को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है। इसी कड़ी में प्रदेश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा द्वारा पंजाब के डेरा बस्सी औद्योगिक क्षेत्र में अनाज(चावल)से एथनॉल उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाई का भ्रमण किया। वहां एथनॉल उत्पादन की बारीकियों को समझा एवं एथनॉल उत्पादन की प्रक्रिया में उत्पादित होने वाले बाई प्रॉडक्ट्स के लिए उपलब्ध बाज़ार एवं उनके मूल्य की जानकारी प्राप्त की। मंत्री के साथ भ्रमण के दौरान सीएसआईडीसी के प्रबंध निर्देशक अरुण प्रसाद, अपरसंचालक उद्योग प्रवीण शुक्ला, विभाग के आलोक त्रिवेदी ,ओ पी बंजारे के साथ अन्य अधिकारी भी थे । इकाई के भ्रमण के दौरान इकाई प्रबंधन ने एथनॉल की उत्पादन लागत निर्धारण से सम्बंधित सभी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रतिनिधि मंडल को प्रदान की ।

राज्य में एथेनॉल इकाईयों मिलने वाली सुविधा

इन इकाईयों में स्थायी रूप से पूंजी निवेश करने पर 45 से 100 प्रतिशत तक एसजीएसटी की प्रतिपुर्ति की पात्रता होगी। वहीं इन इकाईयों को विधुत शुल्क में शत-प्रतिशत छूट 9 साल तक दिया जाएगा। स्टाम्प ड्यूटी में पूरी तरह से छूट दी जाएगी। इसके अलावा तकनीकी पेटेंट अनुदान भी दिया जाएगा। जो कूल लागत का करीब 50 प्रतिशत और अधिकतम 10 लाख रुपए तक का होगा। इन इकाईयों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और पर्यावरण प्रबंधन अनुदान की भी पात्रता होगी।

यहां लगेंगे प्लांट

छत्तीसगढ़ में कुल 15 प्लांट लगाने के लिए औद्योगिक इकाईयों ने तैयारी शुरू कर दी है। इनमें मुंगेली में 3, महासमुंद, रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, और अन्य जिलों में दो-दो, बलौदाबाजार और जांजगीर-चांपा में एक-एक प्लांट लगेंगे।