रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि का विकास और किसानों का कल्याण छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास और इसे किसानों तक पहुंचाने के कार्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में आज से कृषि विश्वविद्यालय में प्रारंभ हो रही फाईटोसेनेटरी लैब का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

सीएम ने कहा कि गांवों के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में अब कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित प्रसंस्करण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। गौठानों में गोबर से जैविक खाद के निर्माण, बिजली उत्पादन और वैल्यू एडीशन के कार्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कृषि को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालय की भूमिका अहम

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की खेती-किसानी को नई दिशा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों को आज और मजबूती मिल रही है। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। गांवों को स्वावलंबी बनाने में कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए तकनीक विकसित की गई है। उसका उपयोग गांवों में स्थापित किए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में किया जाएगा। कृषि उत्पादों और लघु वनोपज उत्पादों के प्रसंस्करण से किसानों की आय में वृद्धि होगी और लोगों तक शुद्ध कृषि उत्पाद पहुंचेंगे। इन उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता में छत्तीसगढ़ अग्रणी रहेगा।

किसान और वैज्ञानिकों को करीब आना जरूरी

सीएम भूपेश ने कहा कि राज्य के कृषि क्षेत्र में एक मजबूत वैज्ञानिक-अधोसंरचना का निर्माण करना हमारी प्राथमिकताओं में रहा है। उन्होंने कहा कि किसान और विज्ञान एक-दूसरे के जितने करीब आएंगे कृषि-क्षेत्र की समृद्धि उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। राज्य में कृषि पद्धति के सुधार, फसल विविधीकरण के विस्तार, उत्पादन में बढ़ोतरी और वैल्यू एडीशन के माध्यम से किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए हमने राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक-संगठनों से भी एमओयू किए हैं।

पूरे देश को रास्ता दिखा रहा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोदो-कुटकी-रागी जैसी लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में मिशन मिलेट शुरु किया गया है। इसके लिए आईआईएमआर के साथ अनुबंध किया गया है। इसी तरह लघु वनोपजों के वैल्यू एडीशन से लेकर गौठानों में गोबर से जैविक खाद और बिजली के उत्पादन तक की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों को ज्ञान और अनुसंधानों का लगातार उपयोग कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर जो काम कर रहे हैं, उसकी सराहना आज राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। आज छत्तीसगढ़ प्रदेश पूरे देश को रास्ता दिखा रहा है।