अब लौटने लगी है शांति, त्यौहार के पहले उठाए गए कठोर कदम
रायपुर। अश्विन के महीने की दशमी तिथि पर पूरे देश में दशहरा धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन को विजयादशमी या आयुधपूजा के नाम से भी जाना जाता है। इसे लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। जिनमें सबसे प्रसिद्ध भगवान राम द्वारा रावण का अंत करना और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर नाम के राक्षस का अंत सम्मिलित है। उनकी इस जीत की खुशी देशभर में ही नहीं पूरी दुनिया में मनाई जाती है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। छत्तीसगढ़ के परिपेक्ष्य में देखें तो पिछली बार कोरोना के कारण राज्य में सार्वजनिक तौर पर यह त्यौहार नहीं मनाया गया था।
कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए इसे मनाने की अनुमति इस बार दी गई है। राज्य में कांग्रेस सरकार और उनके मुखिया भूपेश बघेल ने दशहरा के पहले ही शांति के टापू इस राज्य के संस्कारधानी जिले से लगा कबीरधाम जिले में सांप्रदायिक हिंसा के कारण बिगड़े माहौल को साधने का प्रयास किया। यहां पर त्यौहार के पहले धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास किया गया उसे कुचलने में सरकार ने कुशलता पाई। राज्य ने दशहरा के पहले उसका दहन किया। एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए दोनों पक्षों की लड़ाई राजनीतिक रंग ले चुकी थी। पुलिस ने इस सिलसिले में लोगों को पहचान कर उन पर मामला भी दर्ज किया था। माहौल को बिगाडऩे का प्रयास करने वालों को पहचान का सलाखों के पीछे भेजा ताकी लोगों को नवरात्रि और दशहरा मनाने में कोई अड़चन न हो।
सियासी रंग देने का प्रयास
कवर्धा के माहौल को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि एक छोटी सी घटना को बड़ा रूप देने का प्रयास जिन लोगों ने किया है, उनका चेहरा सामने आने के बाद पूरा मामला अब शांत हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद ऐसा मामला पहली बार देखने को मिला। पूरे मामले में विभिन्न धर्म के लोगों की एक जूटता से पूरे मामले का जल्द पटाक्षेप हो गया। आम लोगों ने इस मामले को देखा जिसे लेकर अब भी यह कहा जा रहा है कि जानबूझ कर इसे सियासी रंग देने का प्रयास किया गया।
संप्रदायिक सौहार्द बनाने का प्रयास
नवारात्रि के पूर्व हुए घटना क्रम के समय प्रशासन को इसका आभास नहीं था कि यह इतनी तेजी से बढ़ जाएगा। जिला प्रशासन ने सभी पहलुओं का ध्यान रख पूरे मामले से पुलिस और शासन के बड़े अधिकारियों को अवगत कराया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद मामले के आरोपियों को पहचान कर उन्हें पकडऩे पर जोर दिया। उनके निर्देश के बाद पुलिस ने उन सभी पर एफआईआर किया जो लोगों को भड़काने में संलिप्त पाए गए। अब वहां पर दशहरा के पहले शांति को माहौल है। नवरात्रि में ीाी धार्मिक आयोजन सुचारू रूप ो चले इसे लेकर प्रशासन ने कुछ छूट दी थी। अब वहां पर मामला पूरी तरह से शांत होने के बाद सांप्रदायिक सौहार्द बनाकर अहंकारी रावण के दहन की पूरी तैयारी है।
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