राजनीति दो पार्टियों के बीच हो तो अच्छी रहती है। लेकिन यदि कोई राजनीति के माध्यम से किसी को व्यक्तिगत बदनाम करने की कोशिश तो इसे आप क्या कहेंगे। जशपुर में भीड़ पर गाड़ी चढ़ाने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी होने के साथ हादसे में मृतक के परिजनों के लिए सीएम भूपेश ने तुरंत मुआवजा देने की घोषणा कर दी। सीएम के इस त्वरित निर्णय के बाद विरोधियों के ना सिर्फ मुंह में ताला लग गया बल्कि वो चारों खाने चित भी हुए। लिहाजा सरकार की कानून व्यवस्था को बदनाम करने के लिए फर्जी खबरों का सहारा लेने लगे। दशहरा के बाद जशपुर में एक खबर तेजी से फैली कि एक बच्चे का अपहरण हो गया है।
सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा झूठ


क्या है सच्चाई ?


इस खबर को लेकर विरोधी एक्सीडेंट वाली घटना के साथ सरकार को भरा बुला कहने लगे। लेकिन हकीकत ये थी कि जिस बच्चे के अपहरण का दावा किया जा रहा था वो अपने गांव का रास्ता भूल चुका था। इस बात की पुष्टि खुद जिले के पुलिस कप्तान विजय अग्रवाल ने की। एसपी के मुताबिक बच्चे को लेकर जो लोग अपहरण की बातें फैला रहे हैं वो सरासर गलत है।जशपुर में जिस बच्चे के अपहरण की बात कही गई उसका नाम संदीप मांझी उम्र 5 वर्ष है जो शनिवार सुबह अपने घर से निकलकर खेतों की ओर चला गया था। लेकिन वापसी में रास्ता भटक गया। जिसे उसी गांव में पढ़ाने वाले एक शिक्षक ने देखा और संदीप को अपने साथ गांव ले आए। इस बात की सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद संदीप को उनके माता-पिता के हवाले कर दिया गया।
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