संविधान प्रदत्त पांचवी अनुसूची के प्रावधानों को निष्क्रिय करने को लेकर आदिवासी आंदोलित

रायपुर। हसदेव अरण्य को बचाने के लिए सरगुजा और कोरबा के आदिवासी ग्रामीण पदयात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ की राजधानी में पहुंचे। आदिवासी लामबद्ध होकर खनन क्षेत्र में विस्थापन ओर पंचायतों के अधिकारों के अतिक्रमण का विरोध कर रहे हैं। संवैधानिक प्रतिबद्धता को देखते हुए इन आदिवासियों ने राज्यपाल से इसकी गुहार लगाने पहुंचे। पूरे मामले को देखा जाए तो यह राज्य सरकार का नहीं बल्कि केंद्र सरकार के नियमों का विरोध कर रहे हैं। केंद्र की नीतियों का भुगतान राज्य के भूपेश बघेल सरकार को करना पड़ रहा है। इससे आदिवासी आन्दोलन के भटकाव को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछले पौने तीन साल के कार्यकाल में आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुविधाएं देने का प्रयास किया गया। राज्य सरकार ने अपने स्तर पर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए कई घोषणाएं की है। इन घोषणाओं में वनोपज से लेकर उन्हें वन अधिकार पत्र देने से लेकर उनके सभी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने का कार्य किया है। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति की अगुआई में आए लोग अपने कई मांगों को लेकर पिछले कई साल से संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांगों का संबंध संविधान के द्वारा प्रदत पांचवी अनुसूची के प्रावधानों को निष्क्रिय को लेकर ही रहा है।

यह मांगे है ग्रामीणों की

हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त किया जाए। बिना ग्रामसभा की सहमति के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल बेयरिंग एक्ट के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण को तत्काल निरस्त किया जाए। पांचवी अनुसूची क्षेत्र में किसी भी कानून से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के पूर्व ग्रामसभा से अनिवार्य सहमति के प्रावधान लागू किए जाएं। परसा कोल ब्लाक के लिए ग्राम सभा फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई वन स्वीकृति को तत्काल निरस्त किया जाए और ऐसा करने वाले अधिकारी और कम्पनी पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। घाटबर्रा गांव के निरस्त सामुदायिक वन अधिकार को बहाल करते हुए सभी गांवों में सामुदायिक वन अधिकार और व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता दी जाए। अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का पालन कराया जाए।

आदिवासियों का जनजीवन भी प्रभावित होगा

केंद्र सरकार ने जो 41 कोल ब्लॉक की सूची नीलामी के लिए जारी कर दी। इनमें मोरगा- टू, मोरगा- साउथ, मदनपुर-नार्थ व श्यांग प्रस्तावित है। श्यांग ब्लॉक पूरी तरह एलीफेंट प्रोजेक्ट एरिया में आ रहा है। अन्य तीन ब्लॉक भी प्रोजेक्ट के इर्द- गिर्द हैं। इन इलाकों में हाथी रहवास बना चुके हैं, अब वहां से आदिवासियों की बेदखली का खतरा बढ़ गया है। कोल ब्लॉक से आदिवासियों का जनजीवन भी प्रभावित होगा। कोल ब्लॉक के लिए जंगल उजाड़े जाने से पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा। जीवनदायिनी मिनीमाता बांगो बांध में पानी का भराव क्षेत्र भी कम होने का खतरा बढ़ जाएगा। कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर प्रस्तावित कोल ब्लॉक को निरस्त कराने की दिशा में कदम उठाने कहा है।