नान से लेकर धान परिवहन और ई-टेंडरिंग में मिले घोटाले के सबूत
रायपुर। छत्तीसगड़ में रमन सिंह के 15 साल में हुये भ्रष्टाचार के नान घोटाला कांड, नसबंदी कांड, गर्भाशय कांड, आंखफोडवा कांड, धान परिवहन, और ई-टेंडरिंग घोटाला जैसे जीते जागते सबूत मौजूद है। डीके अस्पताल को रमन सिंह ने अपने दामाद पुनीत गुप्ता को ओएसडी नियुक्त कर अपने शासनकाल में दामाद का अस्पताल बना कर गिरवी रख दिया था। यह इतनी गोपनीय तरीके से किया गया था कि रमन सिंह सरकार जाने के बाद जब प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बनी तब जाकर इसका खुलासा हुआ।
रमन सिंह सरकार में 15 साल गरीबी रेखा के नीचे निवास करने वालों की संख्या बढ़ती ही रही। छत्तीसगढ़ झुग्गियों में देश का सिरमौर राज्य बन गया। भाजपा ने कभी बेरोजगारी, रमन सरकार ने आदिवासियों की चिंता किए बिना समर्थन मू्ल्य में कटौती कर दी। 40 प्रतिशत जंगल और 32 फीसदी आदिवासी आबादी वाले राज्य में बड़ी संख्या में आदिवासी इन्हीं लघु वनोपजों के भरोसे रहते हैं और रमन सिंह सरकार ने इनकी चिंता कभी नहीं की। हर आदिवासी परिवार को 10 लीटर दूध देने वाली जर्सी गाय, हर आदिवासी परिवार से एक सदस्य को नौकरी देने का वादा करके भाजपा की सरकार बस्तर को और आदिवासियों को भूल ही गई।
भ्रष्टाचार में दामाद भी लिप्त!
पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद पर 50 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगा है। शुक्रवार को उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले में गुप्ता के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक कमल किशोर सहारे की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच समिति का गठन किया गया था। उन्होंने मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
4,601 करोड़ रुपये से अधिक की ई-टेंडरिंग में अनियमितता सीएजी ने पकड़ी
छत्तीसगढ़ में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार के कार्यकाल में 4,601 करोड़ रुपये से अधिक की ई-टेंडरिंग में हुईं कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं और इसकी जांच कराने की सिफारिश की है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह अपने कार्यकाल के दौरान इस ई-प्रोक्योरमेंट को निविदा (टेंडर) के लिए सबसे पारदर्शी और निष्पक्ष प्रणाली बताते रहे थे। सीएजी रिपोर्ट में राज्य के 17 विभागों में ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया लागू की गई थी. लेकिन जिन 74 कंप्यूटरों से 1921 ई-टेंडर जारी किए गये, ठेकेदारों ने भी टेंडर भरने के लिए उन्हीं कंप्यूटरों का इस्तेमाल किया। फिर विभाग के कर्मचारियों और अफ़सरों ने उन्हीं कंप्यूटरों से इन टेंडरों को मंज़ूरी दे दी. यानी टेंडर जारी करने वाले अफ़सर अपने ही कंप्यूटर पर ठेकेदारों से टेंडर भरवाते थे और फिर उसे मंज़ूरी भी दे देते थे। सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा की लोक लेखा समिति के पास है।
ऐसी भी गड़बड़ियां
- सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग काम के लिए जारी 1459 टेंडर में एक ही ई-मेल का उपयोग 235 बार हुआ है. जबकि नियमानुसार सभी काम के लिये स्वतंत्र ई-मेल आईडी होनी चाहिए थी.
टेंडर पाने के लिए 79 ठेकेदार ऐसे थे, जिन्होंने दो-दो पैन कार्ड का इस्तेमाल किया। आयकर विभाग के नियमानुसार, किसी भी व्यक्ति के नाम से दो पैन कार्ड नहीं हो सकते। आयकर अधिनियम की धारा 272बी के अनुसार, ये ग़ैरक़ानूनी है. लेकिन किसी भी सरकारी विभाग ने इस पर कभी आपत्ति नहीं की।
-भाजपा शासनकाल में मुख्यमंत्री रमन सिंह के अधीन रहे खनिज विभाग के 1819 मामले ऐसे पाए, जिनमें 2616.51 करोड़ की गड़बड़ी हुई है। - स्कूली बच्चों को सोया मिल्क देने का जिम्मा जिस कंपनी को सौंपा गया था, उसने नियमानुसार न तो किसानों से कच्चा माल खऱीदा और न ही कोई संयंत्र लगाया। बिना टेंडर जारी किए 21.58 करोड़ रुपये की अनियमित खरीद भी कर ली गई।
- स्कूल नहीं, लेकिन छात्रों को स्कॉलरशिप इसी तरह कम से कम 20 ऐसे स्कूलों का पता सीएजी ने लगाया, जो अस्तित्व में ही नहीं थे और वहां बच्चों के लिये 1.40 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति भी निकाल ली गई।
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