रायपुर। राज्योत्सव 2021 का मंच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी गवाह बना। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत की उपेक्षा और अपमान का आरोप लगा दिया। बाद में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसी के अपमान से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में किसी को नहीं छोड़ा गया है, सभी को जोड़ा है।
राज्य अलंकरण से पहले धरमलाल कौशिक ने अपनी बात कहते हुए विधानसभा अध्यक्ष की बात छेड़ी। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव की परंपरा टूटी है। हर बार विधानसभा अध्यक्ष यहां मौजूद रहते थे। उनका उद्बोधन होता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। कौशिक ने कवित्त शैली में कहा कि राज्योत्सव में बिसाहू दास महंत के नाम पर सम्मान दिया जा रहा है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत का तिरस्कार हो रहा है।
इसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत को भी मुख्य अतिथि बनाया गया था। यहां किसी को छोड़ने की बात नहीं है। सभी को जोड़ने की बात है।
राज्य स्थापना के श्रेय पर भी अपनी-अपनी राय
कौशिक ने छत्तीसगढ़ स्थापना का श्रेय दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया। बघेल ने इस श्रेय के साथ छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों, कलाकारों और राज्य आंदोलनकारियों को जोड़ा। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के साथ तत्कालीन विपक्ष की नेता सोनिया गांधी, मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे और विपक्ष के भी नेताओं का भी नाम जोड़ा।
छत्तीसगढ़ तो बना, लेकिन छत्तीसगढ़िया सरकार अब मिली- सीएम
बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ तो बन गया, लेकिन लग ही नहीं रहा था कि छत्तीसगढ़िया सरकार है। छत्तीसगढ़ की बोली- भाषा, गीत संगीत, तीज त्योहारों को अब जाकर सम्मान मिला है। राज्य गीत तो आप लोग बना नहीं पाए। यह हमारी सरकार ने किया। हमने राजकीय गमछा भी बनाया है। बघेल ने कहा कि अब नक्सलवाद बहुत पीछे धकेल दिया गया है। यह वनवासियों को जल, जंगल, जमीन का अधिकार देने से हुआ है।
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