रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन सभी स्वास्थ्य कर्मियों को दिवाली का तोहफा दिया है जिन्हें कोरोना काल पर नौकरी पर रखा गया था, लेकिन आवश्यकता न होने पर सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। इन कर्मचारियों को भविष्य में निकलने वाली नियमित और संविदा भर्ती में वरीयता दी जाएगी। निरंतर 6 महीने का कार्यानुभव रखने वाले अस्थाई कर्मचारियों को ही अनुभव के अधिकतम 10 अंक दिए जाएंगे। लेकिन शासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इनकी सेवा वृद्धि नहीं होगी।
उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इससे संबंधित पत्र मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ-साथ सभी जिला सीएमएचओ को भेजा गया है। क्योंकि अधिकांश नियुक्तियां जिला स्तर पर सीएमचओ द्वारा की गई थीं या फिर मिशन अंतर्गत नौकरियों पर रखा गया था। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 5000 से अधिक कर्मचारियों को कोरोना नर्स, सैंपल कलेक्टर, कांटैक्ट ट्रेसिंग, सैंपल टेस्टिंग ऑफिसर, वैक्सीनेटर ऑफिसर और कम्प्यूटर ऑपरेटर जैसे प्रमुख पद शामिल हैं।
शासन स्तर पर बनाई गई कमेटी
अस्थाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के बाद इनकी तरफ से विरोध हुआ, हड़ताल हुई और प्रदर्शन हुए। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों के सेवा निरंतरता और सेवा शर्तों के संबंध में विचार के लिए विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। इसमें क्रांतिकारी कोरोना योद्धा संघ के पदाधिकारियों को भी बतौर सदस्य रखा था। इसमें साफ-साफ लिखा कि सेवा वृद्धि संभव नहीं है। हां, आपदा में इनकी जान जोखिम में डालकर दी गई सेवा के तहत इन्हें भर्तियों में लाभ दिया जा सकता है।
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