संचालक भू-अभिलेख ने जारी किया पत्र, पांच दिन में मिलेगी कॉपी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब सब तरह के भूमि स्वामियों को अपनी जमीन के सत्यापित दस्तावेज हासिल करने के लिए पटवारी से गुहार लगाने की जरुरत नहीं होगी। दरअसल भू-अभिलेखों की प्रतिलिपि प्रदाय करने के लिए लोकसेवा गांरटी अधिनियम में प्रावधान है। इसके तहत सामान्य रूप से ये दस्तावेज 15 दिनों में और तत्काल की स्थिति में 5 दिनों में देना अनिवार्य है। राज्य में अब कोई भी व्यक्ति कहीं से भी खसरा, बी वन की डिजिटल हस्ताक्षर युक्त कॉपी कहीं से भी कभी भी नि:शुल्क प्राप्त कर सकता है।

जमीन संबंधी दस्तावेज चाहे वह किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो, उसे पटवारी से हासिल करना कठिन काम माना जाता है। शहरी क्षेत्र के लोगों को शायद कम, लेकिन ग्रामीण इलाकों के लोगों को अधिक जूझना पड़ता है। आमतौर पर ये शिकायतें हैं कि पटवारी दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपि आसानी से नहीं देते। कई स्थानों से यह बात भी सामने आती है कि यह काम बिना लेन-देन नहीं होता, लेकिन अब राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित भू-अभिलेख शाखा ने इस बारे में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

ये है मामला

आयुक्त भू-अभिलेख शाखा के संचालक ने इस संबंध में एक शिकायती पत्र के आधार पर निर्देश जारी किया है। यह पत्र राजस्व विभाग के भू-अभिलेख की प्रतिलिपि प्रदाय के नियम में सुधार के संबंध में हैं। पत्र में साफ किया गया गया है कि भू-अभिलेखों की प्रतिलिपि प्रदाय योजना के तहत चालू खसरा, खतौनी एवं नक्शे की प्रति प्रदाय किया जाना छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में शामिल है। इसके तहत सामान्य रूप से 15 एवं तत्काल की स्थिति में 5 दिनों में खसरा, बी-वन की डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रतिलिपि कोई भी व्यक्ति कही से भी, कभी भी निशुल्क प्राप्त कर सकता है।

किसान मजदूर संघ ने की थी पहल

किसान मजदूर संघ ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से शिकायत की थी कि आम जनता को भू-अभिलेखों की प्रतिलिपि प्रदाय करने में विलंब किया जा रहा है। यही नहीं, नियम विरुद्ध अधिक राशि के शुल्क टिकट, स्टांप लगाया जा रहा है। उन्होंने ये भी कहा था कि लोकसेवा गारंटी अधिनियम के माध्यम से निर्धारित समय पर दस्तावेज की प्रतिलिपि नहीं दी जा रही है। ऐसे मामलों की शिकायत पर कलेक्टर भी कार्रवाई नहीं करते हैं। इसकी वजह से लोकसेवा केंद्रों से खसरा, बी-वन की डिजिटल प्रति नहीं दी जाती है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस शिकायत को संचालक भू-अभिलेख को भेजा था। मामले की जांच करने के बाद संचालक भू-अभिलेख ने पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।