शिक्षा की गुणवत्ता में बदलाव का दावा
छत्तीसगढ़ के स्कूल स्तर की शिक्षा में हुए पांच नवाचारों ने 50 साल पुराने शिक्षा के ढांचे में बड़ा बदलाव कर दिया है। प्रदेश में लागू हुए इन प्रमुख नवाचारों को अब पूरा देश जानेगा। प्रदेश के स्कूलों में चल रहीं प्रमुख नवाचार गतिविधियों के जरिए शिक्षा विभाग ने विजन डॉक्यूमेंट केंद्र सरकार के सामने रखा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को राज्य एससीईआरटी के संचालक पी. दयानंद ने बताया कि एमएचआरडी ने छत्तीसगढ़ में बच्चों के असेसमेंट के लिए हुए एसएलए (स्टेट लेवल असेसमेंट) की तर्ज पर देश भर में स्कूल बेस्ड असेसमेंट करने का निर्णय है। एसएलए नवाचार को देश भर में लागू किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत भी सरकार का मानना है कि शिक्षा गुणवत्ता के लिए नवाचार जरूरी है, पर बेहतर नवाचार हर बच्चे तक पहुंचे, तब तो उसका परिणाम सार्थक हो सकता है। प्रदेश के प्रमुख पांच नवाचार ऐसे हैं, जिनसे शिक्षा की गुणवत्ता में बदलाव होने का दावा किया जा रहा है। आठवीं तक के बच्चों में भाषा, गणित और विज्ञान की शिक्षा के लिए कौशल विकसित करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। बच्चों में सहज तरीके से अंग्रेजी में अपनी बात कहने की क्षमता विकसित करने, आनलाइन पढ़ाने, वीडियो बनाने, क्यूआर कोड बनाने में शिक्षक भी सक्षम होने लगे हैं।

एप के जरिए डेटा कलेक्शन और मॉनिटरिंग

स्कूल शिक्षा में कई तरह के एप का इस्तेमाल मोबाइल पर कराने से शिक्षा की राह आसान हो गई। अब कागज और फाइलों के बजाय शिक्षक और बच्चों को डिजिटल शिक्षा की ओर लाया जा रहा है। प्रदेश में खासकर एसएलए एप के जरिए मोबाइल से बच्चों का मूल्यांकन, दीक्षा एप से ऑनलाइन टीचिंग, यू-डाइस एप से ऑनलाइन डेटा कलेक्शन, शालाकोष एप से योजनाओं की मॉनिटरिंग, शिक्षकों के डेटा के लिए शिक्षक मितान, सीएएटी और टीटीएमएस के जरिए डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है।

मोबाइल के जरिए असेसमेंट

बच्चों के शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए सबसे पहले उनकी उपलब्धि का स्तर प्रदेश में एसएलए (स्टेट लेवल असेसमेंट) के जरिए आंका गया। इसमें प्रदेश के 43 हजार 824 प्राइमरी-मिडिल के बच्चों का सतत मूल्यांकन किया गया। पहली बार बेसलाइन टेस्ट मॉडल में 28 लाख से अधिक बच्चों के 48 प्रश्न पत्रों का मूल्यांकन करके 1.4 करोड़ आंसर शीट का मूल्यांकन मोबाइल एप के जरिए किया गया। ऑनलाइन मोबाइल के जरिए 33 करोड़ डाटा एंट्रीज करके बच्चों का डेटाबेस तैयार किया गया।

क्यूआर कोड से लिंक कर दिए कई बोलियों में वीडियो

सरकारी पाठ्यपुस्तक की किताबों में पहली से लेकर 10वीं तक की 67 किताबों में 3040 क्यूआर कोड छापे गए। इन्हें दीक्षा एप से लिंक कराया गया। इन क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही इससे संबंधित पाठ के लिए ई-कंटेट, ऑडियो और वीडियो उपलब्ध हो जाता है। मल्टी लैंग्वेज में पहली बार छत्तीसगढ़ी, हलबी, गोडी, सरगुजिया, कुडुख बोली में भी वीडियो बनाए गए।

मल्टीमीडिया में कंवर्ट नौवीं-10वीं की किताबें

पहली बार स्कूलों की किताबों को मल्टीमीडिया टेस्टबुक में कंवर्ट कर दिया गया। कक्षा नौवीं और 10वीं के हर चेप्टर के लिए विशेषज्ञों ने ऑडियो-वीडियो के जरिए कंटेट उपलब्ध कराए।

छोटे बच्चों को जल्द सिखाने के लिए 70 किताबें

स्कूली बच्चों को जल्द से जल्द बेहतर पढऩे की सीख देने के लिए एससीईआरटी ने पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों के लिए अर्ली ग्रेड रीडर्स स्टडी मटेरियल तैयार किया है। इस मटेरियल में छोटे-छोटे वाक्यों से बच्चे जल्द से जल्द पढऩा सीख जाते हैं, उन्हें अक्षरों का ज्ञान भी जल्द ही हो जाता है। इन कक्षाओं के लिए पतली-पतली 70 से अधिक छोटी किताबें बनाई गई हैं।