भूपेश सरकार कर रही पूरी व्यवस्था, पीडीएस, मिलर्स से जुटा रहे बारदाना
रायपुर। प्रदेश में इस वर्ष भी 15 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी होगी। खरीदी एक दिसंबर से शुरू होगी और 31 जनवरी 2022 तक चलेगी। धान के साथ ही सरकारी खरीदी केंद्रों में मक्का की भी एक दिसंबर से ही खरीदी शुरू हो जाएगी। धान के लिए 15 और मक्का खरीदी के लिए 10 क्विंटल प्रति एकड़ के मापदंड को ही इस बार भी मान्य किया गया है। प्रदेश में इस आर धान का रकबा दो लाख हेक्टेयर बढ़ा है। वहीं किसानों की संख्या में 2 लाख 41 हजार की बढ़ोत्तरी हुई है। प्रदेश में अब तक 22 लाख 67 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।
राज्य सरकार ने इस बार 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। धान खरीदी के लिए 5.25 लाख गठान बारदाने की जरूरत है। केंद्र सरकार को बारदाना की किल्लत को दूर करने 2 लाख 14 हजार से अधिक बारदाने की मांग डीजीएसएण्डडी से की गई थी। जूट कमिश्रर ने इसके बदले मात्र 86 हजार से अधिक जूट बारदाने उपलब्ध कराया है। अब सरकार राईस मिलरों, पीडीएस दुकानों, किसानों और प्लाटिक के बारदाने खरीद कर पूरा करने का प्रयास कर रही है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक शेड्यूल भी जारी किया था। इसके मुताबिक अगस्त में 19 हजार, सितंबर में 32 हजार, अक्टूबर में 72 हजार नवंबर में 15 हजार और दिसंबर में 76 हजार गठान बारदानों की आपूर्ति मिलनी थी।
10 हजार गठान रोज लगेगी
पिछले वर्ष की धान खरीदी में प्रतिदिन औसतन 10 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता पड़ी थी। पिछली बार सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था। इस बार धान खरीदी 105 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। यानी बारदानों की जरूरत बढ़ेगी।
किसानों को ऑनलाईन भुगतान
धान और मक्का बेचने वाले किसानों को केंद्र सरकार से घोषित एमएसपी के हिसाब से ही आनलाइन उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। वहीं राजीव गांधी न्याय योजना के तहत दी जाने वाली राशि इस बार भी अलग से दी जाएगी। कैबिनेट ने धान खरीदी के लिए 14,700 करोड़ कर्ज के लिए गारंटी देने का फैसला किया है। धान खरीदी में नोडल एजेंसी मार्कफेड ने 25 हजार करोड़ की राशि का प्रावधान किया है।
सहकारी समितियों के नुकसान की भरपाई के लिए 250 करोड़
धान खरीदी करने वाले सहकारी समितियों को 2020-21 में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कैबिनेट ने 250 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से धान के उठाव में देरी के कारण समितियों को इस बार नुकसान उठाना पड़ा है। समितियों की मांगों को पूरी किए जाने के बाद समितियों ने काम काज शुरू कर दिया है। अपैक्स बैंक ने भी यहां पर सुरक्षा और संग्रहण को लेकर राशि जारी कर दी है।
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