14 निकायों में आठ पर कांग्रेस और 6 पर भाजपा का कब्जा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दस जिलों में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने रणनीति तैयार कर ली है। सभी जिलों मेें प्रभारी जिले के प्रभारी मंत्रियों को जीताने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन निकायों में दुर्ग जिले की भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा और नगर पालिका में जामुल, रायपुर जिले के बीरगांव नगर निगम का चुनाव मुख्य है। नगरीय निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिले में आता है। यहां से कई मंत्री भी आते हैं। दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में मो. अकबर और अन्य मंत्रियों को यहां पर कमान संभालने कहा गया है। चुनाव को लेकर कांग्रेस भवन में इन क्षेत्रों के विधायक, सांसदों और पर्यवेक्षकों से चर्चा कर रणनीति तैयार की गई।

जिन निकायों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें नगर निगम भिलाई में कांग्रेस का कब्जा था। यहां पर कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव महापौर रहे हैं। बीरगांव में भाजपा का कब्जा रहा, यहां पर अंबिका यदू महापौर के रूप में काम किया। भिलाई-चरौदा में भी भाजपा का कब्जा है यहां पर चंद्रकांता माण्डले महापौर रही। नए निगम के रूप में रिसाली नगर निगम का गठन अभी किया गया है। वहां पर पहला चुनाव होगा। नगर पालिका जामुल मेें कांग्रेस की सरोजनी चंद्राकर, बैकुण्ठपुर में कांग्रेस के अजय जायसवाल, शिवपुर चरचा में कांग्रेस के अजय लकड़ा, खैरागढ़ में कांग्रेस की मीरा चोपड़ा, मारो में कांग्रेस की फोहरा बाई मिरी, कोंटा में कांग्रेस की मौसम जया और भोपालपटनम में कांग्रेस के कामेश्वर गौतम का अध्यक्ष के रूप में कब्जा था।

कांग्रेस बना रही रणनीति

वहीं प्रेमनगर में भाजपा की दुलारी बाई, सारंगढ़ में भाजपा के अमित अग्रवाल, नरहरपुर में भाजपा के भूपेश नेताम और भैरमगढ़ में भाजपा के दशरथ सरगुलिया का अध्यक्ष पद पर का कब्जा था। देखा जाए तो जिन स्थानों में चुनाव हो रहे हैं, वहां पर कांग्रेस 8 और भाजपा का 6 निकायों में कब्जा है। कांग्रेस अब इस सभी स्थानों में कब्जा जमाने की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस के सामने चुनौती

निकाय चुनाव में सभी निगमों, नगर पालिका और नगर पंचायतों में कब्जा करना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। इन 15 स्थानों में बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के नगर पंचायतों में भाजपा का वर्चस्व रहा है। कोंटा कोंटा और भोपालपटनम में कवासी लखमा की वजह से कांग्रेस ने परचम लहराया था। यहां पर अब सिलगेर और अन्य घटनाओं के चलते समीकरण बदले हैं। सरकार ने फिर एक बार यहां पर उन्हें जिम्मेदारी दी है। जिन जिलों में चुनाव है वहां के प्रभारी मंत्रियों को वहां पर पाटी्र द्वारा बनाए गए पर्यवेक्षक के साथ समन्वय बनाकर काम करने कहा गया है। इनके समक्ष पहली चुनौती प्रत्याशी चयन की है। चयन में फिर से वार्ड स्तर पर सक्रिय पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर दिया गया है। प्रत्याशी चयन के पूर्व कई जगहों पर आरक्षण रोस्टर में बदलाव से कई वर्तमान पार्षद अपना क्षेत्र बदलने के प्रयास में है। टिकट को लेकर घमासान को देखते हुए वहां के विधायकों भी शामिल किया जा रहा है।

जिले और वहां के प्रभारी मंत्री

दुर्ग, रायपुर,धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, बेमेतरा,बिलासपुर,रायगढ़, कोरिया,सूरजपुर,कांकेर,कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में निकाय चुनाव और उप चुनाव होना है। इन जिलों में प्रभारी मंत्रियों को यहां पर कांग्रेस को जीताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोहम्मद अकबर- दुर्ग, रविंद्र चौबे- रायपुर, टीएस सिंहदेव-बेमेतरा, ताम्रध्वज साहू-कोरिया, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम-रायगढ़, कवासी लखमा- दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव, डॉ. शिव कुमार डहरिया-सूरजपुर, अनिला भेड़िया- कांकेर, धमतरी, गुरु रूद्र कुमार-सुकमा, जयसिंह अग्रवाल- बिलासपुर, अमरजीत भगत- राजनांदगांव शामिल है।

वार्ड स्तर पर होगा होगा सर्वे

चुनाव के पहले 30 नवंबर तक वार्ड कमेटी, बूथ कमेटी गठन पूर्ण किए जाएंगे। घोषणा पत्र समिति, प्रचार-प्रसार समिति का गठन भी किया जाएगा। कांग्रेस के पर्यवेक्षक विभिन्न वार्डों में जाकर संभावित प्रत्याशी के संबंध में सर्वे करेंगे। जानकारी लेने के बाद पार्टी के समक्ष रखा जाएगा। चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों से बायोडाटा नहीं लिया जाएगा। वार्ड में सर्वे के आधार पर जीतने योग्य दावेदार को प्रत्याशी बनाया जाएगा। विधानसभा चुनाव के पश्चात हुए नगरीय निकाय चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के रिकॉर्ड को दोहराया जायेगा।