परिपक्व लोगों और युवाओं के बीच सीएम ‘दाऊ’ ‘कका’ के नाम से लोकप्रिय
रायपुर। प्रदेशवासियों को राज्य संस्कृति, पारंपरिक त्योहार और खेलों से जोड़े रखने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहले दिन से ही छत्तीसगढ़ की अस्मिता और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सर्वाधिक महत्व दिया। इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी के साथ ही धान खरीदी का काम सरकार ने लगातार जारी रखा। जिससे सीएम बघेल की किसानों के बीच एक अच्छी छवि बनकर सामने आई। राज्य में 45 लाख से अधिक किसानों को उन्होंने अपनी योजनाओं में किसी न किसी रूप में लाभ देने का प्रयास किया है। विपक्षी दलों के बीच उनकी छवि को उनके बीच से हटाने का हर प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में उनके समक्ष कोई मुद्दा नहीं बचने से भूपेश का अच्छा माइलेज प्रदेश में मिल रहा है। सरकार भी अपनी घोषणाओं को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।
सरकार बनने के बाद नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी जैसी महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की। राज्य सरकार की इस योजना की अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के अलावा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। इस योजना से आज किसानों की आमदनी बढ़ रही साथ ही कई अन्य फायदे भी सामने आ रहे हैं। गौठान में मवेशी सुरक्षित रखे जाते हैं। आर्गेनिक खेती के लिये पर्याप्त मात्रा में खाद और पशुओं की देखभाल व उनके लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था हो रही है। वहीं, गांवों से गोबर खरीदने जैसी योजना भी शुरू की। इसका सीधा फायदा किसानों को होता हुआ नजर आ रहा है। आज किसान गोबर बेच कर बाइक और गाड़ियां खरीद रहे हैं। पूरे देश में दिल्ली के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों को सबसे सस्ती बिजली मिल रही है।
सीएम की सीधे संवाद की शैली
सीएम बघेल की एक खासियत है कि वे हमेशा प्रदेशवासियों से जुड़े रहते हैं। चाहे सुख हो या दुख, वे हर मौके पर सीधे संवाद की शैली को अपनाते हैं। कोरोना काल में कई बार ये भी देखने में आया कि सीएम ने सीधे लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं का तत्काल निराकरण भी किया। आज सीएम परिपक्व मतदाताओं के बीच में ‘दाऊ’ के नाम के नाम से जाने जाते है। जबकि युवाओं के बीच में वे ‘कका’ के नाम से लोकप्रिय हैं।
कोरोनाकाल की योजनाओं ने दिलाया ये मुकाम
राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन में आने के बाद बघेल ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इनमें प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले ऐसे बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना प्रमुख है, जिन्होंने कोविड-19 की वजह से अपने माता-पिता को खो दिया है। ‘महतारी दुलार योजना’ के तहत ऐसे बच्चों की पढ़ाई का खर्च छत्तीसगढ़ सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा नीति आयोग की रैंकिंग में भी छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
देश में छत्तीसगढ़ 7वें नंबर पर
नीति आयोग की एसडीजी इंडिया इंडेक्स रिपोर्ट 2020-21 के अनुसार, सतत विकास लक्ष्यों के लैंगिक समानता पैरामीटर पर छत्तीसगढ़ भारत में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य है। नीति आयोग 15 संकेतकों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति को ट्रैक करता है। पिछले साल, छत्तीसगढ़ ने लैंगिक समानता पैरामीटर पर 43 अंक हासिल किए और भारत में सातवें स्थान पर था। इस साल छत्तीसगढ़ ने 61 अंक हासिल किए और सूची में टॉप पर रहा।
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