रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ी राजभाषा के 19 साहित्यकारों-भाषाविदों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने की। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी. संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व विवेक आचार्य, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव अनिल भतपहरी सहित साहित्यकार और भाषाविद उपस्थित थे।

भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद भी छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को बचाएं रखने के लिए जैसा काम होना चाहिए था, वैसा काम नहीं हो पाया था। छत्तीसगढ़ी राजभाषा जरूर बन गई, लेकिन छत्तीसगढ़ी बोलने और लिखने को लेकर हिचक दूर नहीं हुई थी। बीते तीन सालों में स्थिति बदली है, अब मंत्रालय से लेकर बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ी बोली जाने लगी है। वर्ष 2019 में अरपा-पैरी के धार… हमारा राजगीत बना। स्कूलों में अब छत्तीसगढ़ी और स्थानीय बोलियों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है।