प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर रायपुर रोशनी से जगमगा उठा।
राजधानी में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए।
आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में नागरिकों ने उत्साह से भाग लिया।
यह आयोजन प्रदेशव्यापी सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ पर हुआ।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी दीप प्रज्वलित किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।
तेलीबांधा तालाब के मरीन ड्राइव पर मुख्य समारोह हुआ।
शहर के कई प्रमुख मार्ग दीपों की रोशनी से जगमगाते रहे।
सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने भी आयोजन में हिस्सा लिया।
आशीर्वाद का दीया बना जनभागीदारी का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने निवास से दीप जलाया।
इसके बाद वे मुख्य कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।
रास्ते में कई स्थानों पर नागरिकों ने उनका स्वागत किया।
छत्तीसगढ़ क्लब चौक से तेलीबांधा तक दीपों की रोशनी दिखी।
भगत सिंह चौक और घड़ी चौक पर भी लोगों ने दीप जलाए।
शारदा चौक, गौरव पथ और शंकर नगर में भी उत्साह रहा।
मुख्यमंत्री ने कई जगह रुककर नागरिकों के साथ दीप प्रज्वलित किए।
उन्होंने जनभागीदारी को आयोजन की महत्वपूर्ण विशेषता बताया।
सेवा संकल्प से जुड़ा आशीर्वाद का दीया
मुख्यमंत्री के अनुसार दीप प्रज्वलन केवल शुभकामना का माध्यम नहीं है।
यह सेवा और जनभागीदारी के संकल्प से भी जुड़ा है।
दीप की रोशनी समाज में आशा का संदेश देती है।
सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा।
इसके तहत प्रदेशभर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे।
पोषण और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
महापुरुषों की प्रतिमाओं पर किया माल्यार्पण
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान महापुरुषों का स्मरण किया।
उन्होंने घड़ी चौक पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
शारदा चौक पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी।
भगत सिंह चौक पर अमर शहीद भगत सिंह को भी याद किया।
इन स्थानों पर मुख्यमंत्री ने नागरिकों से संवाद भी किया।
25 लाख से अधिक दीपों से बना रिकॉर्ड
रायपुर में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए।
आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही।
सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने भी सहयोग किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजन को रिकॉर्ड में शामिल किए जाने की घोषणा हुई।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसे स्थान मिला।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों और आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई दी।
उन्होंने स्वयंसेवकों और जिला प्रशासन की टीम के योगदान का भी उल्लेख किया।
व्यापक जनभागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने इसे सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी यात्रा बताया।
उन्होंने गरीब कल्याण और जनहित से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया।
पक्के आवास, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं की बात कही।
स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय समावेशन का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास में सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने किसान, युवा, महिलाएं और श्रमिकों का भी उल्लेख किया।
‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ की हुई शुरुआत
कार्यक्रम में रायपुर जिला प्रशासन की पहल ‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ लॉन्च की गई।
इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना है।
पहल के जरिए स्क्रीन टाइम कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पढ़ने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पुस्तकों को विचार और कल्पनाशक्ति के लिए उपयोगी बताया।
उन्होंने नई पीढ़ी को अध्ययन की संस्कृति से जोड़ने की बात कही।
सेवा संकल्प अभियान में होंगी कई गतिविधियां
प्रदेशव्यापी अभियान में सेवा से जुड़े कार्यक्रम होंगे।
स्वच्छता और स्वास्थ्य गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
पोषण और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों के जरिए लोगों को जोड़ा जाएगा।
अभियान में सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी रहेगी।
आयोजन की प्रमुख झलकियां
- रायपुर में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए।
- कार्यक्रम को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला।
- मुख्यमंत्री ने नागरिकों के साथ दीप जलाए।
- ‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ का शुभारंभ किया गया।
सेवा संकल्प अभियान की प्राथमिकताएं
- स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- स्वास्थ्य और पोषण पर जागरूकता बढ़ाना।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जोड़ना।
- जनभागीदारी के जरिए सेवा गतिविधियां संचालित करना।
कुल मिलाकर, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में व्यापक जनभागीदारी दिखाई दी।
आशीर्वाद का दीया के जरिए नागरिकों ने दीप प्रज्वलित किए।
इसके साथ प्रदेशव्यापी सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हुई।
वहीं, प्रोजेक्ट अक्षरा से बच्चों को पुस्तकों से जोड़ने का प्रयास होगा।
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