छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 शुरू हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीन दिवसीय मेले का शुभारंभ किया। देशभर से 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी इसमें शामिल हुए। यह आयोजन 18 से 20 सितंबर तक चलेगा।
मेले में उद्योग, तकनीक और नवाचार से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। उद्यमियों को नए कारोबारी संपर्क बनाने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। आयोजन को उद्योगों के बीच संवाद का मंच बताया गया है।
नए उद्योगों के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़
राज्य सरकार पारंपरिक उद्योगों के साथ नए क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है। आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर विशेष फोकस है। ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा देने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार करीब 1100 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम शुरू हुआ है। नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में भी काम जारी है। यहां तकनीक आधारित कंपनियों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं। इससे नए उद्योगों और तकनीकी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं।
औद्योगिक विकास में एमएसएमई की अहम भूमिका
एमएसएमई को अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बताया गया है। छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करते हैं। इससे उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में 1200 से अधिक उद्योग संगठन से जुड़े हैं। मेले में 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं।
नई औद्योगिक नीति से निवेश को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की गई है। इस नीति को उद्योग जगत और हितधारकों से चर्चा के बाद तैयार किया गया। इसमें निवेश और रोजगार को साथ आगे बढ़ाने पर जोर है।
नीति में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के प्रावधान किए गए हैं। नए और उभरते सेक्टरों को भी प्रोत्साहन देने की व्यवस्था है। नीति लागू होने के बाद कई निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई है।
सरकार सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत कर रही है। इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास है। निवेशकों को भूमि और जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर है।
खनिज, वन और ऊर्जा से मजबूत आधार
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिज उपलब्ध हैं। सरकार इन संसाधनों के स्थानीय मूल्य संवर्धन पर जोर दे रही है।
प्रदेश का 44 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित बताया गया है। इमली, महुआ, चिरौंजी और हर्रा-बहेड़ा जैसी वनोपज उपलब्ध हैं। इनके वैज्ञानिक प्रसंस्करण से स्थानीय उद्योगों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
ऊर्जा क्षेत्र भी राज्य की प्रमुख ताकत है। प्रदेश में करीब 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता बताई गई है। नए निवेश के साथ इस क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
युवाओं के रोजगार से जुड़ेगा उद्योग विस्तार
राज्य सरकार औद्योगिक योजनाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर दे रही है। नई नीति में स्थानीय युवाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है।
सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और बाजार से जोड़ना चाहती है। एमएसएमई और स्टार्टअप इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ रोजगार देने वाला बनाने पर भी जोर है।
औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय युवाओं तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
बस्तर में पर्यटन निवेश की संभावनाएं
उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख किया।
बस्तर के जलप्रपात, घने वन और जनजातीय संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। होम-स्टे जैसी पहल स्थानीय परिवारों की आय से जुड़ सकती है।
उद्यमियों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को देखने का आग्रह किया गया। इससे निवेश की विविध संभावनाओं को समझने का अवसर मिल सकता है।
उद्योग और तकनीक का साझा मंच बना मेला
इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों के स्टॉल लगाए गए हैं। यहां पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक तकनीक भी प्रदर्शित की जा रही है।
प्रदर्शनी में आयुर्वेदिक औषधियों और उपचार पद्धतियों से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। आधुनिक मशीनरी और आईटी आधारित तकनीक भी प्रदर्शित की गई है।
उद्यमियों ने अपने उत्पाद, तकनीक और नवाचारों की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने भी विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने उद्यमियों से उनकी गतिविधियों और तकनीकी पहल पर चर्चा की।
निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर
सरकार उद्योगों के लिए सहयोगी वातावरण तैयार करने की बात कह रही है। निवेशकों को सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं देने पर जोर है।
सिंगल विंडो व्यवस्था के जरिए अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करने का प्रयास है। भूमि, अधोसंरचना और दूसरी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा, स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे राज्य में उत्पादन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
मेले की प्रमुख विशेषताएं
- इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 का रायपुर में शुभारंभ हुआ।
- आयोजन 18 से 20 सितंबर तक चलेगा।
- 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी इसमें शामिल हुए।
- आईटी, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी पर जोर है।
निवेश और रोजगार की प्राथमिकताएं
- औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के जरिए निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- सिंगल विंडो सिस्टम से उद्योग स्थापना आसान करने का प्रयास है।
- स्थानीय युवाओं के रोजगार को नीति में महत्व दिया गया है।
- स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन पर जोर है।
कुल मिलाकर, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में उद्योग और निवेश से जुड़े कई विषय सामने आए। औद्योगिक विकास के साथ नए सेक्टरों को बढ़ावा देने पर जोर है। सेमीकंडक्टर, आईटी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की तैयारी है। एमएसएमई और स्थानीय युवाओं को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।