तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर जिले में हुए गैस रिसाव हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच महिला श्रमिकों की मौत के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। अमोनिया रिसाव मामला अब राज्य का प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है।
कैसे हुआ गैस रिसाव हादसा?
यह घटना एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग और निर्यात इकाई में हुई, जहां कार्य के दौरान अचानक पाइपलाइन से अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस तेजी से फैलने के कारण वहां काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए।
महिला श्रमिकों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या महिला श्रमिकों की थी। हादसे के बाद कई कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और सीने में दर्द जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंचाया गया। इस वजह से अमोनिया रिसाव मामला और अधिक संवेदनशील बन गया।
सरकार ने गठित की जांच समिति
हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम का गठन किया है। टीम को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, अमोनिया रिसाव मामला में जवाबदेही तय करना सरकार की प्राथमिकता है।
74 श्रमिक हुए प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में कुल 74 श्रमिक प्रभावित हुए थे। इनमें अधिकांश महिलाओं को अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
कई मरीजों का इलाज जारी
अस्पतालों में भर्ती अधिकांश मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कुछ लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि अन्य का इलाज अभी भी जारी है। इससे अमोनिया रिसाव मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
विधानसभा में क्यों हुआ हंगामा?
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया। विधानसभा में मंत्री के बयान के दौरान विपक्षी सदस्यों ने कई सवाल उठाए।
एआईएडीएमके ने किया वॉकआउट
सदन में तीखी बहस के बाद विपक्षी एआईएडीएमके सदस्यों ने विरोध स्वरूप वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर्याप्त सतर्क नहीं रही। इसी कारण अमोनिया रिसाव मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
पीड़ित परिवारों के लिए राहत
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही मृत श्रमिकों के पार्थिव शरीरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार उठाएगी।
प्रशासन ने दिया भरोसा
अधिकारियों ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल अमोनिया रिसाव मामला की विस्तृत जांच जारी है।
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