शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े माघ मेले के विवाद के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन समाज को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आज सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि सनातनी आपस में ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जबकि बाहरी ताकतें पहले से ही भारत और सनातन मूल्यों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

गोवा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने स्पष्ट कहा कि संत समाज को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की जरूरत है। उनके अनुसार, आंतरिक टकराव से न केवल संत परंपरा की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि सनातन समाज भी कमजोर पड़ता है।

गौ-रक्षा को बताया सामूहिक जिम्मेदारी

बाबा रामदेव ने गौ-रक्षा के मुद्दे पर भी संतों को आत्ममंथन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गायों की सुरक्षा केवल नारों से संभव नहीं है, इसके लिए व्यावहारिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक संत और आश्रम को गौ-पालन की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

माघ मेले की घटना पर जताई नाराजगी

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के साथ हुई कथित बदसलूकी पर बाबा रामदेव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी साधु या संत के साथ अपमानजनक व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह धार्मिक मर्यादाओं के भी खिलाफ है।

उन्होंने यह भी कहा कि साधु वही होता है जो अहंकार से मुक्त हो और तीर्थ स्थलों पर विवाद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। बाबा रामदेव ने अंत में अपील की कि जब सनातन के विरोधी बाहर मौजूद हैं, तब आपसी एकता ही सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।