बाल विवाह रोकथाम के तहत जिला प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के ग्राम साल्हेघोरी में एक नाबालिग बालिका का विवाह रुकवाया।
समय रहते प्रशासन ने रोका बाल विवाह
बाल विवाह रोकथाम के लिए गठित विशेष टीम ने सूचना मिलते ही हस्तक्षेप किया। जिला कार्यक्रम अधिकारी संजुला शर्मा के मार्गदर्शन में टीम मौके पर पहुंची और हल्दी की रस्म से पहले ही विवाह को रोक दिया गया।
बालिका ने दिखाई हिम्मत, किया विरोध
गरीबी, अशिक्षा और आर्थिक तंगी के कारण परिजन विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन बालिका ने साहस दिखाया और इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है।
बाल कल्याण समिति से मिला सम्मान
बालिका को बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया गया, जहां उसे सम्मानित किया गया। साथ ही, परिवार को आवश्यक सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया ताकि बेटी की शिक्षा में कोई बाधा न आए।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह कराने पर 2 साल की सजा और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह या किसी भी संकटग्रस्त बच्चे की जानकारी तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
इस घटनाक्रम से एक बार फिर साबित हुआ कि सजग प्रशासन और जागरूक समाज मिलकर बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म कर सकते हैं। यह पहल न केवल बालिका को उसका अधिकार दिलाने में सफल रही, बल्कि अन्य परिवारों के लिए भी एक प्रेरणा बन गई कि बेटियों को पढ़ाना ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
इसके अलावा, सरकार और सामाजिक संगठनों को भी चाहिए कि वे बाल विवाह उन्मूलन के लिए जनजागरूकता अभियान चलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाएं। इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और बेटियों को उनके अधिकार आसानी से मिल सकेंगे।
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