बासमती धान मिशन

राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। बासमती धान मिशन इसी रणनीति का हिस्सा है। इसलिए विभागीय स्तर पर योजना तैयार की जा रही है।

पायलट प्रोजेक्ट मॉडल पर सहमति

उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही पायलट प्रोजेक्ट मॉडल पर सहमति बनी। बासमती धान मिशन के तहत चयनित क्षेत्रों में प्रारंभिक खेती कराई जाएगी। इसके बाद परिणामों का मूल्यांकन होगा।

निर्यात आधारित कृषि को मिलेगा प्रोत्साहन

सुगंधित चावल की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनी हुई है। दरअसल कई देशों में इसकी स्थिर खपत है। इसलिए निर्यात आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। नतीजतन किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

वैज्ञानिक चयन पर रहेगा जोर

प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन किया जाएगा। वहीं कृषि वैज्ञानिक उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करेंगे। बासमती धान मिशन के लिए जलवायु और मिट्टी की जांच होगी। साथ ही गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।

किसानों के लिए व्यापक व्यवस्था

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने सहयोग की बात कही। इसके अलावा विपणन और खरीद व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। बासमती धान मिशन के अंतर्गत बायबैक मॉडल विकसित किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह पहल किसानों की आय को नई दिशा दे सकती है।

यह भी पढ़ें:
Malviya Nagar Hotel Fire: कैसे बढ़ी मौतों की संख्या?
प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरा हुआ कुंती का घर का सपना
CM Sai की बड़ी तैयारी: खाद भंडारण और वितरण व्यवस्था हुई मजबूत