BFI पर बढ़ा दबाव: खिलाड़ियों के चयन से लेकर कोचिंग पैनल तक, खेल मंत्रालय ने उठाए बड़े सवाल

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) की कार्यप्रणाली अब जांच के घेरे में आ गई है। खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने महासंघ की चयन प्रक्रिया, कोचिंग पैनल और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। इसी को लेकर खेल मंत्रालय ने बीएफआई को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय मुक्केबाज कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल खिलाड़ियों और खेल जगत के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स चयन प्रक्रिया पर विवाद

मंत्रालय ने बीएफआई की चयन नीति को पारदर्शिता से रहित बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटियाला में आयोजित होने वाले मूल्यांकन शिविर को भी साई ने रोकने का निर्देश दिया था। यह शिविर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों के चयन के उद्देश्य से आयोजित किया जाना था।

विवाद की सबसे बड़ी वजह सीओएएस कप को लेकर बनी चयन प्रक्रिया है। आरोप है कि इस टूर्नामेंट में कई योग्य मुक्केबाजों को हिस्सा लेने से रोका गया। इसके बावजूद वहां के पदक विजेताओं को राष्ट्रीय कैंप के लिए प्राथमिकता दी जा रही थी।

कोचिंग पैनल और हाई परफॉर्मेंस यूनिट पर भी सवाल

खेल मंत्रालय ने यह भी कहा कि बीएफआई ने हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर की नियुक्ति अब तक नहीं की है, जबकि इसके लिए पहले ही बजट निर्धारित किया जा चुका है। मंत्रालय का मानना है कि बिना अनुभवी नेतृत्व के खिलाड़ियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।

साथ ही, कोच और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति में भी नियमों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगा है। चयन समिति में साई के प्रतिनिधि को शामिल नहीं करना मंत्रालय की नजर में गंभीर चूक मानी जा रही है।

मुक्केबाजों के भविष्य पर मंडराया संकट

सूत्रों के अनुसार, मूल्यांकन शिविर के दौरान मुकाबलों के परिणाम तुरंत घोषित नहीं किए जाने थे। इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। खिलाड़ियों और कोचों के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर असंतोष देखा जा रहा है।

अब खेल जगत की निगाहें बीएफआई के जवाब पर टिकी हैं। यदि महासंघ संतोषजनक जवाब देने में असफल रहता है, तो खेल मंत्रालय आगे और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।