कवर्धा में इन दिनों जो हो रहा है वह निश्चित ही सभ्य समाज के लिए अच्छा नहीं है। कवर्धा एक शांतिपूर्ण जगह रही है। लेकिन निश्चित रूप से भाजपा और उनके गुंडों को दो समुदायों के बीच की शांति से एलर्जी है। बाकी आप कालक्रम से समझौता है कि जहां भाजपा के नेता आए हैं वहा खून बहा है!
ये हम भी जानते हैं और आप भी जानते हैं कि बीजेपी और उनके राजकुमार राम को नहीं, राम के नाम पर खून बहाने में मानते हैं। ये अहम प्रश्न भी है कि ऐसा क्यों होता है कि बीजेपी और उनके नेता अपने पीछे दंगे और हिंसा लाते हैं?
आग में घी डालकर रोटी सेक रहे
हमे ये समझना होगा कि जब कवर्धा में धारा 144 लागू थी तो एक भाजपा नेता और पूर्व सांसद भीड़ का नेतृत्व क्यों कर रहे थे। स्थिति को शांत करने की बजाय वह आग में घी क्यों डाल रहा है! वो भी तब जब सब कुछ शांत हो चुका है। विवाद की जो जड़ थी उसे पाट दिया गया है। ऐसे में भीड़ को उकसाना कहां तक सही है?
ऐसे समय में ही नेतृत्व की क्षमता क्यों दिखाई जाती है?
नेतृत्वकर्ताओं का ये नेतृत्व किसानों के लिए क्यों नहीं दिखता, इनकी आवाज लखीमपुर जैसी घटनाओं के विरोध में क्यों नहीं उठती ? ये नेता तब कहां छुप जाते हैं जब सिलगेर में कई निर्दोष ग्रामीण गोलियों से भून दिए जाते हैं? क्या धर्म ही इनके लिए एक मुद्दा है जिसके आधार पर ये राजनीति करते हैं! क्योंकि ये इतिहास रहा है कि इन नेतृत्वकर्ताओं के जो आका हैं वे विकास के मुद्दों को छोड़कर कभी धर्म पर, कभी जाति पर, कभी देश के जवानों पर ही अपनी ओछी राजनीति करते आए हैं!
विकास का मोदी मॉडल
एक पूर्व सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे लिंचिंग भीड़ का नेतृत्व कर रहे हैं। यह विकास का मोदी मॉडल है जो नफरत और दंगों को बढ़ाने में मदद करता है। जबकि अर्थव्यवस्था डूबती है और मुद्रास्फीति बढ़ती रहती है!
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
